अंकिता पटेल
पैसे बचाने के लिए बड़ी कमाई होना जरूरी नहीं है। हर महीने अपनी आय का एक छोटा हिस्सा बचाने का लक्ष्य तय करें। सैलरी या कमाई मिलते ही बचत की रकम अलग रख दें और बाकी पैसों से महीने का खर्च चलाएं।
महीने की शुरुआत में किराया, राशन, बिजली का बिल, यात्रा और दूसरी जरूरी जरूरतों का बजट बनाएं। साथ ही मनोरंजन और खरीदारी के लिए भी एक सीमा तय करें। इससे आपको पता रहेगा कि पैसा कहां खर्च हो रहा है।
ऑनलाइन सेल, आकर्षक ऑफर और अचानक खरीदारी का मन कई बार बजट बिगाड़ सकता है। कोई गैर-जरूरी चीज खरीदने से पहले सोचें कि क्या आपको उसकी वास्तव में जरूरत है।
रोजाना बाहर की चाय-कॉफी, बार-बार ऑनलाइन खाना मंगाना या बिना जरूरत की छोटी खरीदारी महीने के अंत तक बड़ी रकम बन सकती है। एक महीने तक अपने छोटे खर्चों का रिकॉर्ड रखें।
अगर संभव हो, तो बचत के लिए अलग बैंक खाता रखें। इससे रोजमर्रा के खर्च और भविष्य के लिए रखे पैसों का हिसाब अलग रहेगा। अपनी सुविधा के अनुसार हर महीने नियमित रकम उसमें जमा करें।
डिस्काउंट और कैशबैक के लालच में कई बार ऐसी चीजें भी खरीद ली जाती हैं, जिनकी जरूरत नहीं होती। खरीदारी से पहले अलग-अलग विकल्पों की कीमत और गुणवत्ता की तुलना करें।
जरूरत न होने पर लाइट, पंखे और दूसरे बिजली के उपकरण बंद रखें। पानी की बर्बादी रोकें और घर के जरूरी सामान की खरीदारी सूची बनाकर करें। मोबाइल और इंटरनेट प्लान की भी समय-समय पर समीक्षा करें।
बीमारी, नौकरी में बदलाव या अचानक आने वाले जरूरी खर्चों के लिए इमरजेंसी फंड मददगार होता है। अपनी आमदनी और जिम्मेदारियों के अनुसार धीरे-धीरे ऐसी रकम जमा करें, जिससे कुछ महीनों के जरूरी खर्च पूरे हो सकें।
अगर आपकी आमदनी नियमित है, तो बैंक की उपलब्ध सुविधा के अनुसार तय तारीख पर बचत खाते में रकम ट्रांसफर करने की व्यवस्था कर सकते हैं। इससे हर महीने अलग से पैसे बचाने की याद नहीं रखनी पड़ेगी।
बचत को किसी लक्ष्य से जोड़ें, जैसे बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदना, यात्रा या भविष्य की जरूरतें। हर लक्ष्य के लिए जरूरी रकम और समय तय करें। महीने के अंत में देखें कि कितनी बचत हुई और कहां खर्च कम किया जा सकता है।