रीता राय सागर
कपास से बनने वाले कपड़े हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। टी-शर्ट, शर्ट, साड़ी से लेकर बेडशीट तक, कपास से ही सबकुछ बनता है।
कपास के पौधे पर पहले फूल आते हैं और बाद में उनमें सफेद रुई जैसे फाहे तैयार होते हैं। यही कपास आगे चलकर धागा और फिर कपड़ा बनाने के काम आता है।
कपास तैयार होने के बाद उसकी चुनाई की जाती है। कई जगह आज भी किसान हाथ से कपास चुनते हैं, जबकि बड़े स्तर पर मशीनों का इस्तेमाल भी होता है।
चुनी हुई कपास में बीज और दूसरी गंदगी मिली होती हैं। जिनिंग प्रोसेस की मदद से रेशों को बीज से अलग किया जाता है।
बीज अलग होने के बाद मुलायम कपास के रेशे मिलते हैं। इन्हीं रेशों की गुणवत्ता आगे बनने वाले धागे और कपड़े की क्वालिटी तय करती है।
कपास के रेशों को कातकर धागा तैयार किया जाता है। यही धागा आगे कपड़े की बुनाई में इस्तेमाल होता है।
करघे या आधुनिक मशीनों की मदद से कपास के धागों की बुनाई होती है। इसी प्रक्रिया में कपड़े का असली टेक्स्चर निकल कर आता है।
कॉटन फैब्रिक से कुर्ते, साड़ियां, शर्ट, जींस, टी-शर्ट और कई तरह के कपड़े तैयार किए जाते हैं। डिजाइन और रंग में बदलाव करके इसे फैशन का हिस्सा बनाया जाता हैं।
कॉटन कपड़ा आमतौर पर हल्का और हवा के अनुकूल होता है। यही वजह है कि गर्म मौसम में कॉटन के कपड़ों की मांग बढ़ जाती है।
कपास सिर्फ फैशन तक सीमित नहीं है। खेत से आपकी अलमारी तक के इस सफर से किसानों, बुनकरों, कपड़ा उद्योग और फैशन से जुड़े लाखों लोगों की रोजी-रोटी चलती है।