रीता राय सागर
क्या इससे याददाश्त पर असर पड़ता है? होश आने में कितना समय लगता है? जानिए 5 आम सवालों के जवाब।
एनेस्थीसिया के बाद कुछ लोगों को कुछ समय तक भ्रम, सुस्ती या ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। उम्रदराज मरीजों में ऑपरेशन के बाद भ्रम का खतरा अधिक होता है।
ऐसा होना आम तौर पर नामुमुकिन है। एनेस्थीसियोलॉजिस्ट दवाओं और मरीज के जरूरी शारीरिक संकेतों की निगरानी करता है, ताकि एनेस्थीसिया सुरक्षित तरीके से दिया जा सके।
एनेस्थीसिया की दवाएं बंद होने के बाद मरीज अक्सर कुछ ही मिनटों में जागना शुरू कर देता है। हालांकि, यह पूरा समय दवाओं, सर्जरी की अवधि और मरीज की सेहत पर निर्भर करता है। हर मरीज के लिए एक तय समय नहीं होता।
सर्जरी के बाद एनेस्थीसिया का असर कम होने पर ऑपरेशन वाली जगह पर दर्द महसूस हो सकता है। इसे नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर जरूरत के मुताबिक पेन किलर देते हैं। दर्द कितना होगा, यह सर्जरी पर निर्भर करता है।
एनेस्थीसिया में गंभीर जटिलताओं का जोखिम पूरी तरह शून्य नहीं होता। लेकिन मरीज की जांच, सही तैयारी और लगातार निगरानी से जोखिम को कम किया जाता है। उम्र, बीमारी और सर्जरी जैसे फैक्टर भी जरूरी है।
आंखें खुलने का मतलब पूरी तरह सामान्य हो जाना नहीं है। कुछ समय तक नींद, चक्कर, जी मिचलाना या उलझन रह सकती है। इसीलिए मरीज को रिकवरी रूम में निगरानी में रखा जाता है।
सुस्ती और रिस्पॉन्स होने जैसे असर लगभग 24 घंटे तक रहते हैं, कभी-कभी इससे ज्यादा भी। डॉक्टर के निर्देशों के मुताबिक आराम करें। गाड़ी चलाने और शराब पीने जैसी गतिविधियों से बचें।
अपनी एलर्जी, चल रही दवाओं, पुरानी बीमारियों और पहले एनेस्थीसिया के दौरान हुई किसी परेशानी की जानकारी जरूर दें। अपने डाउट्स भी पहले ही पूछ लें।
हर साल 16 अक्टूबर को मनाए जाने वाले इस दिन का उद्देश्य एनेस्थीसिया की अहमियत और सुरक्षित सर्जरी में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।