सुनीता पांडे
कंजक पूजा नवरात्रि की अष्टमी या नवमी के दिन की जाती है।
इस दिन नौ कन्याओं की पूजा के साथ-साथ काल भैरव के बाल रूप की भी पूजा की जाती है।
ऐसी मान्यताएं हैं कि काल भैरव के बिना मां दुर्गा की पूजा और नौ दिन का व्रत अधूरा है।
इसलिए जो लोग नवरात्रि के दौरान विशेष सिद्धियों के लिए मां दुर्गा की पूजा करते हैं, वे बाबा भैरव की पूजा जरूर करते हैं।
यही कारण है कि मां दुर्गा के सभी स्वरूपों के मंदिरों के पास काल भैरव का मंदिर भी है।
वही गृहस्थ लोग बाबा भैरव की पूजा नहीं करते हैं और ना ही उन्हें घर में स्थापित करते हैं। इन्हें तंत्र का देवता माना जाता है।
हालांकि, बटुक भैरव या बाल भैरव की पूजा गृहस्थ लोग कर सकते हैं।
इसके समाधान के लिए तीनों लोकों के देवता ऋषि के पास पहुंचे।
इसके समाधान के लिए तीनों लोकों के देवता ऋषि के पास पहुंचे।
ऋषि-मुनियों ने चर्चा की और बताया कि भगवान शिव ही सर्वश्रेष्ठ हैं।
यह सुनकर ब्रह्मा जी क्रोधित हो गए और भगवान शिव के सम्मान को ठेस पहुंचाने लगे, जिससे शिवजी क्रोधित हो गये।
कहा जाता है कि शिव के इसी क्रोध से काल भैरव का जन्म हुआ।
भैरव का रूप भयानक अवश्य है, लेकिन जो भी सच्चे मन से उनकी पूजा करता है, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी वे स्वयं लेते हैं।