सिमरन सिंह
काजल बनाने के लिए: एक दीया या मिट्टी का छोटा दीपक, रुई की बाती, देसी घी या सरसों का तेल, एक स्टील या पीतल की प्लेट, थोड़ा सा बादाम या कपूर
दीये में घी या तेल डालकर रुई की बाती लगाएं और उसे जला दें। देसी घी का इस्तेमाल काजल को मुलायम और प्राकृतिक बनेगा। सरसों का तेल हल्की ठंडक देगा।
दीये की लौ के ऊपर स्टील या पीतल की प्लेट उल्टी रख दें धुएं की कालिख प्लेट हो। इसे लगभग 10–15 मिनट तक जलने दें। कालिख जम होने पर प्लेट को ठंडा होने दें।
अब प्लेट पर जमी हुई कालिख को किसी छोटे बर्तन में निकालें। इसमें 1–2 बूंद देसी घी या बादाम का तेल मिलाएं। चाहें तो थोड़ा कपूर पाउडर डालकर एंटीसेप्टिक गुण बढ़ा सकते हैं।
आपका शुद्ध और प्राकृतिक घरेलू काजल तैयार है। इसे किसी साफ डिब्बे में स्टोर करें। रोजाना इस्तेमाल करने से आंखों को ठंडक मिलती है और जलन नहीं होती।
काजल बनाने से पहले सारे बर्तन अच्छी तरह साफ कर लें। काजल को सूखे और ठंडे स्थान पर रखें। बच्चों के लिए कपूर न मिलाएं, केवल घी का प्रयोग करें।