सुनीता पांडे
महाराष्ट्र के कोंकण समुद्र तट और जुन्नार नगर के बीच नानेघाट नामक एक जगह है, जहां ये वाटरफॉल स्थित है।
यह वाटरफॉल मुंबई से लगभग 120 किमी और पुणे से 150 किमी दूर है।
इसे कई नामों से जाना जाता है। कुछ लोग इसे नानेघाट कहते हैं, तो कुछ लोग इसे नाना घाट कहते हैं।
यह झरना गुरुत्वाकर्षण के नियम के विपरीत होता है, इसलिए इसे रिवर्स वाटरफॉल भी कहते हैं।
झरने का जल स्रोत मुख्य रूप से नानेघाट के पहाड़ियों से है।
इस जगह की प्राकृतिक सुंदरता के कारण मानसून के महीनों में इसके आसपास काफी भीड़ रहती है।
घाट की ऊंचाई से झरना नीचे गिरने के बजाय ऊपर आ जाता है।
इस बारे में विज्ञान का कहना है कि नानाघाट में हवा बेहद तेज़ चलती है। इस वजह से जब वाटरफॉल नीचे बहता है तो वह हवा के चलते उड़कर ऊपर आ जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इस शहर की स्थापना सातवाहन वंश ने की थी क्योंकि यह जानकारी ब्राह्मी और संस्कृत भाषा में लिखी नाना घाट की गुफाओं में मिलती है।
नानेघाट का ट्रैक घाटघर के जंगल का एक हिस्सा है। इस जगह को देखने वाले लोगों को इसकी अद्वितीयता पर विश्वास नहीं होता।