रीता राय सागर
सोने में उकेरी देवी-देवताओं के रेड-ग्रीन स्टोन और बेहद बारीक नक्काशी का मतलब है टेंपल ज्वेलरी। यह सिर्फ गहना नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की पुरानी कला और परंपरा की पहचान है।
पुराने समय में देवी-देवताओं की मूर्तियों को सजाने के लिए ऐसे आभूषण तैयार किए जाते थे। बाद में इसी तरह के डिजाइन शास्त्रीय नृत्य और दुल्हन के गहने में भी दिखाई देने लगे।
टेंपल ज्कीवेलरी में सबसे खास पहचान है मां लक्ष्मी की। कमल पर बैठी लक्ष्मी की आकृति को हार, पेंडेंट और अन्य गहनों में उकेरा जाता है। इसे समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
मोर, कमल, हाथी व आम जैसे मोटिफ्स भी टेंपल ज्वेलरी में खूब नजर आते हैं। इन डिजाइनों में मंदिरों की वास्तुकला और धार्मिक प्रतीकों की झलक दिखती है।
कासु मलाइ यानी सिक्कों से बना हार टेंपल ज्वेलरी में बेहद पसंद किया जाने वाला हार है। इसमें एक के बाद एक गोल सिक्के लगे होते हैं, जिन पर अक्सर लक्ष्मी की आकृति बनी होती है।
टेंपल स्टाइल के झुमकों में घंटी जैसी शेप, देवी-देवताओं या फूल और लाल-हरे स्टोन का इस्तेमाल देखने को मिलता है। दुल्हन के भारी हार के साथ ये झुमके लुक को और ट्रे़ेडिशनल बना देते हैं।
वांकी को हाथ की ऊपरी बाजू पर पहना जाता है। इसका डिजाइन अक्सर उल्टे V जैसा होता है और बीच में देवी का चित्र होता है।
ओडियनम दक्षिण भारतीय दुल्हन के गहने का अहम हिस्सा होता है। चौड़ी गोल्ड बेल्ट पर देवी, फूल, पत्तियों की बारीक नक्काशी की जाती है।
समय के साथ टेंपल ज्वेलरी का इस्तेमाल क्लासिकल डांस के लिए भी किया जाता है और फिर यही हेरिटेज डिजाइन के गहने साउथ इंडियन ब्राइड के गहनों तक पहुंची।
आज यह ज्वेलरी पूरे भारत में पसंद की जाती है। ट्रेडिशनल गोल्ड लुक, देवी और एंटीक फिनिश की वजह से इसे शादी से लेकर त्योहार और अलग-अलग मौकों पर पहना जाता है। पुराने शिल्प और नए फैशन का यह मेल खूबसूरत है।