सिमरन सिंह
Power Off करने पर ऑपरेटिंग सिस्टम ऐप्स और ज्यादातर एक्टिविटी बंद कर देता है। डिस्प्ले, प्रोसेसर और मोबाइल नेटवर्क जैसे मुख्य कंपोनेंट्स की पावर भी काट दी जाती है।
Power Off के बाद आप ऐप नहीं चला सकते, इंटरनेट ब्राउज नहीं कर सकते और सामान्य तरीके से कॉल भी नहीं कर सकते। यानी फोन रोजमर्रा के इस्तेमाल की स्थिति में नहीं रहता।
बैटरी से जुड़ा Power Management IC (PMIC) पावर की निगरानी और वितरण से जुड़े जरूरी काम कर सकता है। यह वोल्टेज, तापमान और चार्जिंग जैसी चीजों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
जब बंद फोन को चार्जर से कनेक्ट किया जाता है, तो चार्जिंग से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक्स एक्टिव रह सकते हैं। यानी फोन बंद होने के बावजूद बैटरी को चार्ज करने वाली प्रक्रिया चलती रहती है।
कुछ पुराने या खास सिस्टम वाले फोन Power Off होने के बाद भी Alarm चला सकते थे। आधुनिक स्मार्टफोन्स में यह सुविधा आम तौर पर उपलब्ध नहीं होती। जहां यह फीचर मिलता है, वहां लो-पावर हार्डवेयर या फर्मवेयर इसका समर्थन कर सकता है।
कुछ एडवांस डिवाइसेस में बेहद कम पावर पर काम करने वाला वायरलेस हार्डवेयर डिवाइस को खोजने में मदद कर सकता है। यह सामान्य GPS ट्रैकिंग जैसा नहीं होता और हर फोन में उपलब्ध भी नहीं है।
नॉर्मल Power Off प्रक्रिया में ऑपरेटिंग सिस्टम और कैमरा-माइक्रोफोन से जुड़ी सामान्य गतिविधियां बंद हो जाती हैं। इसलिए फोन ऑफ करने के बाद लगातार रिकॉर्डिंग होने का दावा सही नहीं है।
Restart: फोन बंद होकर दोबारा ऑपरेटिंग सिस्टम लोड करता है।
Power Off: फोन के मुख्य सिस्टम को बंद कर देता है।
छोटी सॉफ्टवेयर समस्या में Restart मददगार हो सकता है, जबकि लंबे समय तक फोन इस्तेमाल नहीं करना हो तो Power Off बेहतर विकल्प है।
Power Off के बाद फोन की ज्यादातर गतिविधियां रुक जाती हैं, लेकिन पावर मैनेजमेंट, चार्जिंग या कुछ खास लो-पावर फीचर्स काम कर सकते हैं। कौन-से सिस्टम एक्टिव रहेंगे, यह फोन के मॉडल, सॉफ्टवेयर और कंपनी की तकनीक पर निर्भर करता है।