सिमरन सिंह
अब कैश रखने, जरूरी दस्तावेजों की फाइल संभालने और टोल पर लंबी कतार में खड़े रहने की जरूरत काफी कम हो गई है। इसके पीछे भारत की कई डिजिटल तकनीकों का बड़ा योगदान है।
चाय की दुकान हो या शॉपिंग मॉल, QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में पेमेंट हो जाता है। फायदा: छुट्टे पैसों की चिंता कम और पेमेंट पहले से ज्यादा तेज।
पहले टोल प्लाजा पर कैश भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता था। FASTag ने इस प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया। फायदा: बिना कैश दिए टोल भुगतान, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होती है।
ड्राइविंग लाइसेंस, RC, मार्कशीट और दूसरे जरूरी दस्तावेजों को डिजिटल तरीके से सुरक्षित रखने की सुविधा मिलती है। फायदा: जरूरत पड़ने पर मोबाइल से डिजिटल डॉक्यूमेंट एक्सेस किए जा सकते हैं।
DigiLocker ने जरूरी कागजात को डिजिटल रूप में संभालना आसान बनाया है। इससे दस्तावेज खोने या उनकी फाइल साथ रखने की परेशानी कम होती है।
Open Network for Digital Commerce यानी ONDC का मकसद छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों को डिजिटल कॉमर्स से जोड़ना है। फायदा: किराना स्टोर और लोकल रेस्टोरेंट जैसे कारोबार भी ऑनलाइन ग्राहकों तक पहुंच सकते हैं।
NavIC भारत का स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है। इसे भारत और आसपास के क्षेत्र को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। फायदा: लोकेशन और नेविगेशन से जुड़ी सेवाओं में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
UPI से पेमेंट, FASTag से सफर, DigiLocker से दस्तावेज, ONDC से कारोबार और NavIC से नेविगेशन। इन तकनीकों ने दिखाया है कि डिजिटल आत्मनिर्भरता सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रही है।
15 अगस्त सिर्फ स्वतंत्रता का जश्न नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता और नई तकनीकी क्षमता को देखने का भी मौका है। UPI, FASTag, DigiLocker, ONDC और NavIC जैसी तकनीकें दिखाती हैं कि भारत किस तरह डिजिटल भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।