फोन से गायब हो गया रिमूवेबल बैटरी

सिमरन सिंह

कभी हर फोन में होती थी रिमूवेबल बैटरी

पुराने मोबाइल में बैटरी निकालना आम बात थी, खराब होते ही नई बैटरी डालकर फोन फिर नया, यूजर को मिलता था पूरा कंट्रोल

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स्मार्टफोन के पतले होने की शुरुआत

कंपनियों ने स्लिम और प्रीमियम डिजाइन पर फोकस किया, रिमूवेबल बैटरी से फोन मोटा बनता था, नॉन-रिमूवेबल बैटरी से डिजाइन हुआ ज्यादा स्टाइलिश

वाटरप्रूफ और डस्टप्रूफ फोन की जरूरत

IP रेटिंग के लिए सीलबंद बॉडी जरूरी, रिमूवेबल बैटरी से पानी और धूल का खतरा, फिक्स्ड बैटरी ने फोन को ज्यादा सुरक्षित बनाया

मजबूत बॉडी और बेहतर परफॉर्मेंस

सीलबंद फोन ज्यादा मजबूत होते हैं, गिरने पर बैटरी ढीली होने का डर नहीं, हीट मैनेजमेंट भी बेहतर हुआ

फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी का असर

फास्ट चार्ज के लिए खास बैटरी डिजाइन जरूरी, रिमूवेबल बैटरी में यह मुश्किल, नॉन-रिमूवेबल बैटरी से चार्जिंग तेज हुई

ज्यादा फीचर्स, कम जगह

कैमरा, 5G, बड़े सेंसर ने जगह घेर ली, बैटरी को बॉडी में फिक्स करना जरूरी हुआ, हर मिलीमीटर की अहमियत बढ़ गई

कंपनियों का बिजनेस फायदा

बैटरी खराब होने पर सर्विस सेंटर जाना, रिप्लेसमेंट से कंपनियों को कमाई, यूजर फोन जल्दी बदलने पर मजबूर

यूजर रिपेयर से दूर

खुद बैटरी बदलना अब आसान नहीं, रिपेयर का कंट्रोल कंपनी के पास, यही वजह Right to Repair की मांग

पर्यावरण और सेफ्टी का तर्क

गलत बैटरी से ब्लास्ट का खतरा, फिक्स्ड बैटरी ज्यादा सुरक्षित, रीसाइक्लिंग को भी बताया गया कारण

क्या रिमूवेबल बैटरी लौटेगी?

कुछ कंपनियां फिर सोच रही हैं, EU जैसे देशों में नियम सख्त, भविष्य में हो सकती है वापसी

कार का फ्यूल टैंक हमेशा पीछे ही क्यों होता है?

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