सिमरन सिंह
रानी कर्णावती गढ़वाल के राजा महिपत शाह की पत्नी थीं।
पति की मृत्यु के बाद, कर्णावती ने 7 साल के बेटे पृथ्वीपत शाह के लिए गद्दी संभाली थी।
कर्णावती को शासन के बारें में परिवार से ज्ञान मिला जो हिमाचल का राज परिवार था।
रानी ने कृषि और सामाजिक कल्याण के लिए कई काम किए।
जब कुमाऊंनी राजा बाजबहादुर चंद ने मुगलों से मिलकर गढ़वाल पर आक्रमण की योजना बनाई।
1635 में नजाबत खान के नेतृत्व में 30,000 मुगल सैनिक गढ़वाल पर हमला करने के लिए आए।
नजाबत खान ने कर्णावती को 10 लाख रुपये का नजराना भेजने को कहा।
कर्णावती ने 1 लाख रुपये भेजे, लेकिन बाकी रकम नहीं।
मुगलों को शिवालिक की पहाड़ियों में गढ़वाली सैनिकों ने घेर लिया।
गढ़वाली सैनिकों ने छापामार युद्ध से मुगलों को कमजोर कर दिया।
मुगलों को रसद की कमी और अफरातफरी को झेलना पड़ा।
रानी ने नजाबत खान को कहा कि वे बिना नाक कटवाए वापस नहीं जा सकते है।
फिर मुगलों ने हार मान नाक कटवाई और अपमान साहा
हार के बाद शाहजहां ने गढ़वाल पर कभी आक्रमण नही किया।
रानी कर्णावती को "नक्कटी रानी" भी कहा जाता है।