सिमरन सिंह
वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए PUC जांच बेहद जरूरी है। लेकिन बिना सही जांच के सर्टिफिकेट जारी होने पर पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।
नई व्यवस्था में PUC सेंटरों पर लगे सर्विलांस कैमरों से सेंटर की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। इससे जांच प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
कैमरों के जरिए यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि जिस वाहन का PUC बना है, वह वास्तव में सेंटर पर आया था या नहीं। इससे फर्जी तरीके से सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लग सकती है।
कुछ मामलों में वाहन को सेंटर पर लाए बिना ही PUC सर्टिफिकेट जारी करने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कैमरा निगरानी से ऐसी गड़बड़ियों को पकड़ना आसान हो सकता है।
नई व्यवस्था का मकसद सिर्फ सेंटरों की निगरानी करना नहीं है। अगर वाहन का प्रदूषण तय सीमा से ज्यादा है, तो उसे सही तरीके से जांच में फेल किया जाना चाहिए।
अब PUC बनवाना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं रह सकता। अगर गाड़ी से ज्यादा धुआं निकल रहा है या प्रदूषण तय सीमा से ऊपर है, तो पहले वाहन की समस्या ठीक करानी होगी।
पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए नियमित प्रदूषण जांच ज्यादा जरूरी है। सर्विसिंग, इंजन और प्रदूषण नियंत्रण उपकरण सही रखना भी अहम होगा।
कैमरों की अनिवार्यता के बाद PUC सेंटर संचालकों को नियमों के मुताबिक जांच करनी होगी। जरूरत पड़ने पर निगरानी रिकॉर्ड के आधार पर सेंटर की गतिविधियों की जांच की जा सकेगी।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण के कई कारण हैं, जिनमें वाहनों का उत्सर्जन भी शामिल है। ऐसे में सही PUC जांच और पारदर्शी सर्टिफिकेशन सिस्टम प्रदूषण नियंत्रण की कोशिशों को मजबूत कर सकता है।