सिमरन सिंह
😊😂😢 आज WhatsApp से लेकर Instagram तक हर जगह इमोजी का इस्तेमाल होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन छोटे-छोटे डिजिटल चेहरों की कहानी कहां से शुरू हुई थी?
आज हर भावना के लिए अलग इमोजी मौजूद है। लेकिन कुछ दशक पहले ऑनलाइन चैट में फीलिंग्स बताने के लिए रंगीन इमोजी नहीं, बल्कि कीबोर्ड के सामान्य कैरेक्टर इस्तेमाल किए जाते थे।
इमोजी की कहानी से पहले Emoticons का दौर आया था। 19 सितंबर 1982 को अमेरिकन कंप्यूटर साइंटिस्ट स्कॉट फालमैन ने ऑनलाइन मैसेज बोर्ड पर :-) और :-( जैसे संकेतों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था।
उस दौर में ऑनलाइन बातचीत आज जितनी आसान नहीं थी। टेक्स्ट में सामने वाले का चेहरा, आवाज या हाव-भाव नजर नहीं आते थे। इसलिए यह समझना मुश्किल हो जाता था कि कोई व्यक्ति मजाक कर रहा है या गंभीर बात कह रहा है।
मजाक और सामान्य बातचीत में फर्क समझाने के लिए :-) का इस्तेमाल किया जाने लगा। यह खुशी या मजाकिया अंदाज को दर्शाता था। यानी टेक्स्ट के साथ एक छोटा-सा संकेत सामने वाले को बात का मूड समझा देता था।
इसके उलट :-( उदासी या गंभीर भाव को बताने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। खास बात यह है कि सिर को थोड़ा झुकाकर देखने पर इन कैरेक्टर्स में आंखें, नाक और मुंह जैसा चेहरा दिखाई देता है।
धीरे-धीरे ऐसे टेक्स्ट संकेत इंटरनेट की बातचीत का हिस्सा बन गए। इन्हें Emoticons कहा जाने लगा। ऑनलाइन चैट बढ़ने के साथ लोगों के बीच इनका इस्तेमाल भी तेजी से लोकप्रिय हुआ।
इंटरनेट और मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल ने डिजिटल बातचीत को पूरी तरह बदल दिया। लोग तेजी से चैट करने लगे और अपनी भावनाएं कम शब्दों में जाहिर करने के नए तरीके तलाशने लगे।
टेक्नोलॉजी के विकास के साथ टेक्स्ट कैरेक्टर की जगह रंग-बिरंगे ग्राफिकल Emojis ने लेनी शुरू कर दी। अब खुशी, प्यार, गुस्सा, दुख, हंसी और हैरानी जैसे भावों के लिए अलग-अलग इमोजी मौजूद हैं।
आज एक छोटा-सा ❤️, 😂 या 😡 कई बार पूरी बात कह देता है। WhatsApp, Instagram और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म पर इमोजी हमारी डिजिटल भाषा का अहम हिस्सा बन चुके हैं। यानी :-) से शुरू हुआ सफर आज हजारों इमोजी तक पहुंच चुका है।