सिमरन सिंह
Reverse Charging में एक स्मार्टफोन अपनी बैटरी की पावर दूसरे डिवाइस को देता है। यह सुविधा दो तरह से काम कर सकती है बिना तार के या चार्जिंग केबल के जरिए। हालांकि, हर फोन में यह फीचर नहीं मिलता।
फोन को दूसरे फोन से चार्ज करने के मुख्य तौर पर दो तरीके हैं:
Wireless Reverse Charging: दोनों फोन को पास रखकर चार्ज किया जाता है।
Cable Charging: दोनों डिवाइस को केबल से जोड़कर एक फोन से दूसरे को पावर दी जाती है।
कुछ Google Pixel स्मार्टफोन में Battery Share फीचर मिलता है। वहीं Samsung के कुछ Galaxy मॉडल में Wireless PowerShare दिया जाता है। लेकिन फीचर का सपोर्ट मॉडल के हिसाब से अलग हो सकता है, इसलिए अपने फोन की सेटिंग्स जरूर चेक करें।
अगर बिना केबल फोन चार्ज करना है, तो जिस फोन से पावर दी जा रही है उसमें Reverse Wireless Charging होनी चाहिए। जिस फोन को चार्ज करना है, उसमें भी Wireless Charging Support जरूरी है। सिर्फ USB-C पोर्ट होना पर्याप्त नहीं है।
सबसे पहले फोन में Wireless PowerShare या Battery Share ऑन करें। इसके बाद दूसरे फोन को पहले फोन के बैक पैनल पर रखें। दोनों फोन की वायरलेस चार्जिंग कॉइल सही जगह पर होनी चाहिए। जरूरत पड़े तो फोन का कवर हटा दें।
नहीं! Reverse Charging को सामान्य चार्जर की Fast Charging जैसा नहीं समझना चाहिए। इसका असली फायदा इमरजेंसी में है, जब आपके पास चार्जर या पावर बैंक उपलब्ध न हो।
हां, जिस फोन से दूसरे डिवाइस को चार्ज किया जा रहा है, उसकी बैटरी तेजी से कम होगी। Wireless Reverse Charging में कुछ ऊर्जा गर्मी में भी बदल सकती है। इसलिए इसे जरूरत पड़ने पर ही इस्तेमाल करना बेहतर है।
Reverse Charging के दौरान फोन गर्म हो सकता है, खासकर Wireless Charging में। अगर तापमान ज्यादा बढ़ जाए तो चार्जिंग धीमी हो सकती है या फोन खुद चार्जिंग रोक सकता है। फोन बहुत गर्म हो तो तुरंत चार्जिंग बंद कर दें।
यह फोन के मॉडल और तकनीक पर निर्भर करता है। अगर Android फोन Reverse Wireless Charging सपोर्ट करता है और दूसरा फोन Wireless Charging सपोर्ट करता है, तो यह काम कर सकता है। ध्यान रखें, सिर्फ USB-C पोर्ट होने से फोन-टू-फोन चार्जिंग की गारंटी नहीं होती।