सिमरन सिंह
लोक अदालत में कुछ लंबित मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया जाता है। इसमें पात्र ट्रैफिक चालान भी शामिल हो सकते हैं।
शराब पीकर गाड़ी चलाने जैसे गंभीर मामलों में लोक अदालत से राहत मिलना तय नहीं है। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ सकता है।
अगर मामला गंभीर दुर्घटना या आपराधिक आरोप से जुड़ा है, तो उसका निपटारा सामान्य ट्रैफिक चालान की तरह नहीं किया जा सकता।
सड़क पर स्टंट करना या दूसरों की जान जोखिम में डालना गंभीर उल्लंघन हो सकता है। ऐसे मामलों में चालान निपटाने के नियम अलग हो सकते हैं।
अगर वाहन किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है या मामला FIR से जुड़ा है, तो यह जरूरी नहीं कि उसे लोक अदालत में निपटाया जा सके।
हेलमेट या सीट बेल्ट जैसे सामान्य ट्रैफिक उल्लंघनों के पात्र चालान लोक अदालत में निपटाए जा सकते हैं। राहत मिलना मामले और स्थानीय नियमों पर निर्भर है।
रेड लाइट जंप करने या नो-पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने जैसे मामलों में भी पात्र चालान के निपटारे का विकल्प मिल सकता है।
अपने चालान का स्टेटस और लोक अदालत की पात्रता जांचें। जरूरी दस्तावेज साथ रखें और संबंधित ट्रैफिक पुलिस या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सूचना देखें।
लोक अदालत का उद्देश्य पात्र मामलों का समझौते से निपटारा करना है। चालान माफ होगा या जुर्माने में राहत मिलेगी, यह संबंधित मामले और नियमों पर निर्भर करता है।