अंकिता पटेल
शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक नवदुर्गा के नौ नाम "देवी कवच" में क्रम से आते हैं। इसे मार्कंडेय पुराण के दुर्गा सप्तशती पाठ से जोड़ा जाता है। यहाँ एक श्लोक में पहले से नौवें स्वरूप तक का पूरा क्रम बताया गया है।
"शैल" का अर्थ पर्वत है। हिमालय की पुत्री होने से वे शैलपुत्री कहलाईं। मान्यता है कि पूर्वजन्म में वे सती थीं। उनके हाथ में त्रिशूल और कमल है और वाहन वृषभ है।
"ब्रह्म" का अर्थ तप है, यानी तप का आचरण करने वाली। कथा के अनुसार उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल रहता है।
मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने से इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। सिंह पर सवार देवी के दस हाथों में अस्त्र-शस्त्र बताए गए हैं। माना जाता है कि इनकी आराधना से भय दूर होता है।
मान्यता है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब देवी ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण इन्हें सृष्टि की आदिशक्ति कहा जाता है।
भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है। उनकी माता होने से देवी स्कंदमाता कहलाईं। वे अपनी गोद में बालरूप स्कंद को लिए कमल पर विराजमान दिखाई जाती हैं।
कथा के अनुसार महर्षि कात्यायन के घर जन्म लेने से देवी कात्यायनी कहलाईं। उन्हें महिषासुर का वध करने वाली शक्ति माना जाता है। भागवत में गोपियों द्वारा कात्यायनी व्रत करने का उल्लेख मिलता है।
गहरे काले वर्ण और बिखरे केशों वाला इनका रूप उग्र दिखता है, पर भक्तों के लिए ये शुभ फल देने वाली मानी जाती हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहते हैं। इनका वाहन गर्दभ बताया गया है।
श्वेत वस्त्रों और उज्ज्वल रूप वाली महागौरी का वाहन वृषभ है। कथा है कि कठोर तप से उनका वर्ण श्यामल हो गया था, जिसे गंगाजल से स्नान के बाद फिर गौर रूप मिला। अष्टमी पर इनकी पूजा।
कमल पर विराजमान सिद्धिदात्री को अष्ट सिद्धियाँ प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। देवी पुराण की मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने भी इन्हीं की कृपा से सिद्धियाँ पाईं और अर्धनारीश्वर कहलाए।