अंकिता पटेल
गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू होते ही नागपुर के बाजार गणपति की मूर्तियों और सजावटी सामान से सज जाते हैं। जानिए शहर की उन जगहों के बारे में, जहां खरीदारी के लिए जा सकते हैं।
चितार ओली की खासियत सिर्फ तैयार मूर्तियां नहीं, बल्कि उन्हें आकार देने और सजाने वाले कारीगर भी हैं। गणेशोत्सव से पहले यहां मूर्तिकारों की हलचल बढ़ जाती है।
महाल की चितार ओली नागपुर की मशहूर मूर्ति-निर्माण गलियों में शामिल है। यहां अलग-अलग आकार और डिजाइन की गणेश मूर्तियां देखने को मिलती हैं।
इतवारी नागपुर के पुराने और व्यस्त बाजार क्षेत्रों में से एक है। चितार ओळी के आसपास होने के कारण गणेशोत्सव की खरीदारी के दौरान इस इलाके में भी खूब चहल-पहल दिखाई देती है।
घर के गणपति के लिए छोटी मूर्ति चाहिए या सार्वजनिक मंडल के लिए बड़ी प्रतिमा-मूर्ति बाजारों में अलग-अलग आकार और डिजाइन के विकल्प मिल सकते हैं।
गणपति स्थापना के साथ सजावट की तैयारी भी जरूरी है। बाजारों में पूजा सामग्री, सजावटी सामान और उत्सव से जुड़ी कई चीजें देखने को मिल सकती हैं।
नागपुर में कुम्हारपुरा इलाके में भी गणेश मूर्ति बनाने वाले कारीगरों और छोटी दुकानों का उल्लेख मिलता है। यह जगह स्थानीय मूर्ति-निर्माण परंपरा से जुड़ी है।
मूर्ति खरीदते समय आकार, सामग्री, रंग और कीमत के साथ स्थानीय नियमों का भी ध्यान रखें। पर्यावरण के लिहाज से स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को प्राथमिकता देना बेहतर है।
गणेश की खूबसूरत प्रतिमा के पीछे कारीगरों की कई दिनों की मेहनत होती है। चितार ओली और आसपास के इलाकों में पीढ़ियों से मूर्ति बनाने वाले परिवार भी इस कला से जुड़े रहे हैं।
महाल की चितार ओली से लेकर आसपास के पारंपरिक बाजारों तक, गणेशोत्सव के दौरान नागपुर की बाजार संस्कृति अलग ही रंग में नजर आती है। खरीदारी से पहले बाजार की जानकारी जरूर जांच लें।