अंकिता पटेल
'ॐ' भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण मंत्र माना जाता है। इसका जाप ध्यान और श्वास पर ध्यान केंद्रित करने का एक सरल तरीका हो सकता है।
मंत्र आधारित ध्यान पर हुई एक बड़ी समीक्षा में तनाव और चिंता के स्तर में छोटे से मध्यम सुधार देखे गए। हालांकि शोध की गुणवत्ता में कुछ सीमाएं भी थीं।
जाप के दौरान बार-बार एक ही ध्वनि पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इससे मन को एक जगह टिकाने और ध्यान की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
कुछ शोधों में ओम जाप के दौरान शरीर की स्वायत्त तंत्रिका गतिविधि में बदलाव देखे गए हैं। इसे relaxation response से जोड़ा गया है।
ओम का उच्चारण करते समय सांस लेने और छोड़ने पर ध्यान जाता है। यह प्रक्रिया ध्यान और mindful breathing के अभ्यास को बढ़ावा दे सकती है।
कुछ अध्ययनों में ओम आधारित अभ्यासों के साथ नींद और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सकारात्मक संकेत मिले हैं। लेकिन इसे नींद की समस्या का इलाज नहीं माना जा सकता।
एक छोटे EEG अध्ययन में ओम जाप के दौरान मस्तिष्क के कुछ नेटवर्क में गतिविधि में बदलाव और relaxed state से जुड़े संकेत मिले।
इसके लिए कोई एक वैज्ञानिक रूप से तय सही समय नहीं है। शुरुआत में कुछ मिनट शांत बैठकर जाप करना आसान विकल्प हो सकता है। नियमितता अवधि से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
आराम से बैठें, आंखें बंद करें और सहज सांस लें। फिर धीरे-धीरे 'ॐ' का उच्चारण करें। आवाज और सांस पर ध्यान रखते हुए कुछ मिनट अभ्यास करें।
ओम जाप का सबसे संभावित लाभ शांत मन, एकाग्रता से जुड़ा है। वैज्ञानिक शोध उत्साहजनक हैं, लेकिन लंबे समय के प्रभावों को समझने के लिए अभी और मजबूत अध्ययन जरूरी हैं।