अंकिता पटेल
मच्छर भगाने में काम आने वाला कॉइल कीटनाशक छोड़ता है, लेकिन इसके जलने से निकलने वाला धुआं भी घर की हवा को प्रभावित कर सकता है।
पारंपरिक कॉइल में कीटनाशक के साथ लकड़ी का बुरादा जैसे ज्वलनशील पदार्थ और स्टार्च जैसे बाइंडर इस्तेमाल हो सकते हैं; कुछ उत्पादों में खुशबू भी मिलाई जाती है।
कई कॉइल में पाइरेथ्रिन या सिंथेटिक पाइरेथ्रॉइड जैसे कीटनाशक सक्रिय घटक के रूप में इस्तेमाल होते हैं। इनका काम मच्छरों के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करना है।
कॉइल सुलगने पर महीन कणों के साथ कई गैसीय प्रदूषक और कार्बनिक यौगिक निकल सकते हैं। शोध में PM2.5, एल्डिहाइड और PAHs जैसे प्रदूषक पाए गए हैं।
एक अध्ययन में बंद दरवाजे-खिड़कियों वाले कमरे में कॉइल जलाने पर PM2.5 और CO का स्तर काफी ऊंचा पाया गया; हवा का आवागमन बढ़ाने पर स्तर में बड़ी कमी देखी गई।
कॉइल के धुएं में मौजूद महीन कण और अन्य प्रदूषक सांस के साथ शरीर में जा सकते हैं। लगातार या ज्यादा एक्सपोजर से श्वसन संबंधी परेशानी का जोखिम चिंता का विषय है।
CDC के अनुसार पाइरेथ्रिन और पाइरेथ्रॉइड सांस के जरिए या त्वचा के संपर्क से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। बहुत अधिक एक्सपोजर में सिरदर्द, चक्कर अन्य तंत्रिका संबंधी लक्षण हो सकते हैं।
कॉइल में इस्तेमाल होने वाले सक्रिय रसायन और बेस सामग्री अलग-अलग हो सकती हैं। शोध में बेस सामग्री बदलने से धुएं में PM2.5 और कुछ प्रदूषकों के उत्सर्जन में अंतर पाया गया है।
कॉइल को बंद कमरे में लंबे समय तक जलाने से बचें, पर्याप्त वेंटिलेशन रखें और इसे बच्चों तथा ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। हमेशा पैकेट पर दिए उपयोग निर्देशों का पालन करें।
कॉइल मच्छरों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसका धुआं घर के अंदर वायु प्रदूषण बढ़ा सकता है। इसलिए लेबल के अनुसार इस्तेमाल और पर्याप्त हवा का आवागमन बेहद जरूरी है।