सिमरन सिंह
आज मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल करने के काम नहीं आता। सोशल मीडिया, बैंकिंग, शॉपिंग और कई डिजिटल सेवाओं में नंबर जुड़ा होता है। यही वजह है कि इसका लीक होना बड़ी प्राइवेसी समस्या बन सकता है।
अगर अचानक अनजान नंबरों से लगातार स्पैम कॉल, फर्जी SMS, WhatsApp मैसेज या संदिग्ध ऑफर आने लगें, तो सावधान हो जाएं। यह संकेत हो सकता है कि आपका नंबर किसी अनजान डेटा लिस्ट तक पहुंच गया है।
मोबाइल कनेक्शन लेते समय टेलीकॉम कंपनी के पास आपका नाम, मोबाइल नंबर और अकाउंट से जुड़ी जानकारी होती है। कंपनी की Privacy Policy और Data Sharing नियमों को समझना इसलिए जरूरी है।
शॉपिंग वेबसाइट, सर्वे, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और अलग-अलग सेवाओं में बार-बार मोबाइल नंबर डालने से उसकी डिजिटल मौजूदगी बढ़ती जाती है। किसी वेबसाइट का डेटा लीक होने पर नंबर गलत हाथों में पहुंच सकता है।
कई ऐप्स इंस्टॉल करते समय Contacts की परमिशन मांगते हैं। जरूरत न होने पर ऐसी अनुमति देना जोखिम बढ़ा सकता है। हर ऐप को कॉन्टैक्ट एक्सेस देने से पहले सोचें कि उसे इसकी वास्तव में जरूरत है या नहीं।
आपका नंबर सिर्फ आपके द्वारा दी गई जानकारी से ही नहीं फैलता। अगर किसी दूसरे व्यक्ति ने अपनी Contact List किसी ऐप को एक्सेस करने की अनुमति दी है और उसमें आपका नंबर सेव है, तो आपका नंबर भी उस ऐप के सिस्टम तक पहुंच सकता है।
बड़ी टेलीकॉम कंपनियां भी साइबर हमलों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। अगर किसी कंपनी के सिस्टम में सेंध लगती है, तो मोबाइल नंबर के साथ नाम, पता या अकाउंट से जुड़ी जानकारी भी लीक होने का खतरा रहता है।
मोबाइल नंबर गलत हाथों में पहुंचने के बाद लगातार Spam Calls, Phishing Messages और फर्जी ऑफर आ सकते हैं। साइबर अपराधी नंबर का इस्तेमाल आपको धोखा देने या संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश में कर सकते हैं।
अपने मोबाइल ऑपरेटर के अकाउंट में जाकर Privacy और Data Sharing Settings जरूर चेक करें। जहां जरूरत न हो, वहां अनावश्यक डेटा शेयरिंग और मार्केटिंग विकल्पों को बंद कर दें।
पहला: ऐप्स की Permissions नियमित रूप से चेक करें।
दूसरा: गैर-जरूरी वेबसाइटों पर अपना नंबर देने से बचें।
तीसरा: जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए अलग या वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल करें।