अंकिता पटेल
माना जाता है कि भोजन के बाद कन्याओं को उपहार और दक्षिणा देने से पूजन पूर्ण होता है। शुरुआत करें सबसे पारंपरिक भेंट से, यानी लाल चुनरी, जिसे देवी का प्रिय वस्त्र माना जाता है।
कन्या पूजन में नकद दक्षिणा देने की परंपरा है। राशि कितनी हो, इसका कोई नियम नहीं है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्रद्धा और प्रेम से दी गई भेंट ही सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कॉपी, पेंसिल बॉक्स, रंगीन पेंसिलें और कहानी की किताबें बच्चियों के लिए उपयोगी उपहार हैं। यह उपहार शिक्षा के महत्व का संदेश भी देता है और बच्चियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करता है।
फ्रॉक, कुर्ता-सेट या सूट जैसे नए कपड़े भेंट करना शुभ माना जाता है। कपड़े चुनते समय बच्चियों की उम्र, मौसम और आराम का ध्यान रखें, ताकि वे इन्हें आगे भी पहन सकें।
चूड़ियाँ, बिंदी, हेयर क्लिप और रिबन जैसी छोटी चीजें परंपरा में सुहाग और श्रृंगार से जुड़ी मानी जाती हैं। बच्चियों को ये चीजें बहुत पसंद आती हैं और यह उपहार हल्का और सुंदर भी रहता है।
गुड़िया, पज़ल, कलरिंग किट या छोटे खेल बच्चियों के चेहरे पर तुरंत मुस्कान ला देते हैं। इस उम्र की बच्चियों के लिए यह सबसे प्रिय उपहारों में से एक है। चुनते समय उम्र के अनुसार सुरक्षित खिलौने ही लें।
पूजन के बाद केला, सेब जैसे फल या सूखे मेवे और मिठाई देना भी शुभ माना जाता है। परंपरागत रूप से हलवा-पूरी-चने के भोग के साथ फल और मिठाई देने का चलन रहा है।
कई परिवार कन्याओं को रोली-मौली, नारियल, सुपारी या चाँदी के सिक्के भी भेंट करते हैं। इसे शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
स्कूल बैग, पानी की बोतल, टिफ़िन बॉक्स या छोटा पर्स आज के समय में बहुत उपयोगी उपहार माने जाते हैं। ये चीज़ें रोज़ काम आती हैं, इसलिए बच्ची को लंबे समय तक आपकी भेंट याद रहती है।
उपहार चाहे छोटा हो या बड़ा, असली महत्व श्रद्धा और सम्मान का है। हाथ जोड़कर, चरण छूकर और मुस्कान के साथ विदा करना ही सबसे सुंदर भेंट है।