रीता राय सागर
जन्माष्टमी के भोग में धनिया की पंजीरी का खास महत्व होता है। इसे भुने धनिया पाउडर, घी, चीनी और मेवों से तैयार किया जाता है। व्रत रखने वाले भक्त भी इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
आटे, दूध और चीनी से बनने वाला मालपुआ जन्माष्टमी के भोग की थाली को खास बना सकता है। इसे घी में पकाकर चाशनी में डुबोया जाता है और ऊपर से मेवे डालकर परोसा जाता है।
दूध, चावल, चीनी, इलायची और मेवों से बनी खीर त्योहारों की पारंपरिक मिठाई है। जन्माष्टमी पर इसे कान्हा के भोग के लिए तैयार किया जा सकता है।
मखाने, घी और चीनी की चाशनी से तैयार मखाना पाग जन्माष्टमी की भोग थाली में शामिल किया जा सकता है। इसे मेवों से सजाकर और भी स्वादिष्ट बनाया जा सकता है।
बाल गोपाल के भोग की बात हो तो माखन-मिश्री का नाम सबसे पहले आता है। ताजे सफेद मक्खन में मिश्री मिलाकर तैयार यह सरल भोग कान्हा की बाल लीलाओं की याद दिलाता है।
दूध, दही, घी, शहद और चीनी से तैयार पंचामृत पूजा का महत्वपूर्ण प्रसाद है। जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
दूध से बना नरम और दानेदार कलाकंद और दही से तैयार श्रीखंड भी भोग के लिए बेहतरीन विकल्प हैं।
श्रीखंड को दही के चक्के से बनाया जाता है, इसमें केसर और इलायची डालने से इसका जायका और खुशबू दोनों बढ़ जाता है।
भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा के पेड़े बेहद लोकप्रिय हैं। खोया और चीनी से तैयार पेड़े जन्माष्टमी की भोग थाली में पारंपरिक मिठास जोड़ते हैं।
नारियल और चीनी से बनने वाले लड्डू कम समय में तैयार होने वाला स्वादिष्ट भोग हैं। इन्हें जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को अर्पित किया जा सकता है।