सिमरन सिंह
अब फोटो असली है या एडिटेड, इसका पता लगाने में मिलेगी मदद। AI के दौर में Apple का यह फीचर काफी काम का साबित हो सकता है।
आज AI की मदद से ऐसी तस्वीरें बनाई जा सकती हैं जो बिल्कुल वास्तविक नजर आती हैं। यही वजह है कि इंटरनेट पर वायरल होने वाली हर फोटो पर आंख बंद करके भरोसा करना मुश्किल हो गया है।
iPhone 18 Pro और Pro Max में Apple ने फोटो की ऑथेंटिसिटी वेरिफिकेशन से जुड़ा सिस्टम पेश किया है। इसका मकसद फोटो के डिजिटल डेटा के आधार पर उसके सोर्स की जानकारी देना है।
फोटो के साथ मौजूद डिजिटल जानकारी से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि तस्वीर कहां से आई और कैप्चर होने के बाद उसमें बदलाव किया गया या नहीं।
Apple के सिस्टम में फोटो की सोर्स से जुड़ी जानकारी को डिजिटल तरीके से सुरक्षित रखने की व्यवस्था है। बाद में इसी जानकारी का इस्तेमाल फोटो की ऑथेंटिसिटी जांचने में किया जा सकता है।
अगर फोटो की ऑथेंटिसिटी जानकारी मूल कैप्चर से मेल खाती है तो उसके सोर्स पर भरोसा करना आसान हो सकता है। वहीं डिजिटल जानकारी में बदलाव होने पर वेरिफिकेशन में इसका संकेत मिल सकता है।
आज AI इमेज टूल्स से किसी सेलिब्रिटी, जगह या घटना की बेहद वास्तविक दिखने वाली तस्वीर बनाई जा सकती है। कई बार इन्हें देखकर आम यूजर के लिए सच और झूठ पहचानना मुश्किल होता है।
सोशल मीडिया पर एडिटेड या पुरानी तस्वीरों को नए संदर्भ में वायरल करना आम समस्या बन चुकी है। ऐसे मामलों में ऑथेंटिसिटी वेरिफिकेशन यूजर्स को तस्वीर के बारे में एक्स्ट्रा जानकारी दे सकता है।
यह फीचर पत्रकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और रिसर्चर्स के लिए खास उपयोगी हो सकता है। इंटरनेट से मिली किसी तस्वीर को इस्तेमाल करने से पहले उसकी डिजिटल ऑथेंटिसिटी की जांच में मदद मिल सकती है।
यह फीचर फोटो की डिजिटल ऑथेंटिसिटी जांचने में मदद करता है, लेकिन इसे हर तस्वीर के 100% असली होने की गारंटी नहीं समझना चाहिए। फिर भी AI के बढ़ते दौर में फोटो के सोर्स और बदलावों की जानकारी यूजर्स के लिए एक अहम सुरक्षा परत बन सकती है।