अंकिता पटेल
हर साल 11 अक्टूबर को दुनियाभर में मनाया जाता है यह खास दिन। यह तारीख बेटियों के अधिकारों और उनकी उपलब्धियों को सलाम करने के लिए तय की गई है।
19 दिसंबर 2011 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 66/170 पारित करके 11 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से "इंटरनेशनल डे ऑफ द गर्ल चाइल्ड" घोषित किया।
इस दिन को पहली बार 11 अक्टूबर 2012 को दुनियाभर में मनाया गया था, यानी अब यह दिन एक दशक से भी ज्यादा समय से मनाया जा रहा है।
बेटियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे बुनियादी अधिकार दिलाना, और समाज में लिंग-भेद को खत्म करने की दिशा में जागरूकता फैलाना इस दिन का मूल उद्देश्य है।
इस मुहिम की नींव प्लान इंटरनेशनल संस्था के "बिकॉज़ आई एम अ गर्ल" कैंपेन से पड़ी, जिसे बाद में कनाडा सरकार के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचाया गया।
बाल विवाह, स्कूल छोड़ने की मजबूरी और भेदभाव जैसी समस्याओं को उजागर कर, इन्हें जड़ से खत्म करने की दिशा में हर साल नई पहल की जाती है।
हर वर्ष एक अलग थीम के साथ यह दिन मनाया जाता है, जैसे बेटियों की शिक्षा, तकनीक में भागीदारी या बाल विवाह के खिलाफ अभियान।
जब एक बेटी सशक्त होती है, तो पूरा परिवार और समाज आगे बढ़ता है। यही सोच इस दिन को हर साल और भी अहम बनाती है।
आइए इस बेटी दिवस पर संकल्प लें- हर बेटी को बराबरी का हक, बराबरी की उड़ान। खुशियां मनाएं, बेटियों का सम्मान करें।