सिमरन सिंह
भारत में आए दिन सड़क हादसों और Road Rage की खबरें सामने आती हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ सुरक्षित ड्राइविंग का नहीं, बल्कि हादसे के बाद सच्चाई साबित करने का भी है।
किसी एक्सीडेंट के बाद अक्सर यह तय करना मुश्किल होता है कि गलती किसकी थी। बाइक पर लगा Dashcam या Action Camera पूरी घटना रिकॉर्ड कर सकता है, जो पुलिस, अदालत और बीमा प्रक्रिया में उपयोगी सबूत बन सकता है।
हाल में गुरुग्राम में सामने आए चर्चित हिट-एंड-रन मामले ने भी सड़क पर डिजिटल फुटेज की अहमियत को सामने रखा। कैमरे की रिकॉर्डिंग से वाहन और घटना से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है।
कई बार छोटे एक्सीडेंट के बाद दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गलती का आरोप लगाते हैं। ऐसे में कैमरे की रिकॉर्डिंग घटना का पूरा संदर्भ सामने रखने में मदद कर सकती है और गलत दावों या विवादों से बचाव का आधार बन सकती है।
सड़क पर जानबूझकर गाड़ी के सामने आने या झूठे क्लेम जैसी धोखाधड़ी की कोशिशों में वीडियो रिकॉर्डिंग अहम साबित हो सकती है। फुटेज होने पर घटना की वास्तविक स्थिति जांचना आसान हो जाता है।
ओवरटेकिंग, पीछा करने या सड़क पर बदतमीजी जैसी घटनाओं में कैमरा रिकॉर्डिंग काम आ सकती है। कैमरे की मौजूदगी लोगों को अपनी हरकतों पर नियंत्रण रखने के लिए भी प्रेरित कर सकती है।
कैमरा सिर्फ दूसरों की गलतियां रिकॉर्ड करने के लिए नहीं है। फुटेज देखकर आप अपनी ओवरस्पीडिंग, गलत ओवरटेकिंग या दूसरी ड्राइविंग गलतियों को पहचान सकते हैं और राइडिंग बेहतर कर सकते हैं।
सुरक्षा के अलावा कैमरा आपकी बाइक राइड्स और हाईवे के खूबसूरत नजारों को रिकॉर्ड करने के काम भी आता है। MotoVlogging करने वालों के लिए तो यह खास तौर पर उपयोगी है।
बाइक या स्कूटर पर Dashcam/Action Camera लगाना हादसे की स्थिति में डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध करा सकता है और आपकी राइडिंग का अनुभव भी बेहतर बना सकता है। हालांकि कैमरा सुरक्षित और ट्रैफिक नियमों के मुताबिक लगाया जाए, ताकि वह खुद ड्राइविंग में बाधा न बने।