रीता राय सागर
हार्ट अटैक में दिल तक पहुंचने वाला ब्लडफ्लो ब्लॉकेज की वजह से रुक जाता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी में गड़बड़ी के कारण वह अचानक सही तरीके से पंप करना बंद कर देता है।
हार्ट अटैक के दौरान सीने में दबाव, जकड़न या दर्द हो सकता है। इसके अलावा सांस फूलना, पसीना, जी मिचलाना या चक्कर आने के साथ दर्द हाथ, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट तक महसूस हो सकती है।
कार्डियक अरेस्ट में व्यक्ति बेहोश होकर गिर जाता है, आवाज देने या छूने पर प्रतिक्रिया नहीं देता और सामान्य रूप से सांस नहीं लेता। सिर्फ हांफता रहता है।
हार्ट अटैक में आमतौर पर दिल धड़कता रहता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल रक्त पंप करना बंद कर देता है।
अगर हार्ट अटैक का शक हो, तो लक्षण को गैस, थकान या सामान्य कमजोरी समझकर न टालें। तुरंत स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करें।
अगर कोई व्यक्ति अचानक गिर गया है, प्रतिक्रिया नहीं दे रहा और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा, तो इसे कार्डियक अरेस्ट की इमरजेंसी मानकर तुरंत इमरजेंसी में कॉल करें।
कार्डियक अरेस्ट में अगर व्यक्ति प्रतिक्रिया नहीं दे रहा और सामान्य सांस नहीं ले रहा है, तो CPR शुरू करें। वयस्क में छाती के बीचोंबीच तेज और लगातार दबाव देना CPR का हिस्सा है।
ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर कार्डियक अरेस्ट में इस्तेमाल होने वाला उपकरण है। इसे चालू करने के बाद डिवाइस के निर्देशों का पालन किया जाता है। यह जरूरत होने पर शॉक देने का काम करता है।
सीने में असामान्य दर्द या दबाव, सांस फूलना, ठंडा पसीना या अचानक बेहोशी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट दोनों में समय पर मेडिकल मदद बेहद महत्वपूर्ण है।