रीता राय सागर
तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसे सही तरीके और सीमित मात्रा में पीना जरूरी है।
तांबा शरीर के लिए एक जरूरी मिनरल है, जो आयरन के इस्तेमाल, एनर्जी प्रोडक्शन और कई एंजाइम्स के सामान्य काम-काज में भूमिका निभाता है।
तांबे के बर्तन में पानी रखने को कॉपर चार्जिंग कहा जाता है। पानी कुछ घंटों तक बर्तन के संपर्क में रहने पर उसमें कॉपर की थोड़ी मात्रा आ जाती है।
कॉपर शरीर में आयरन के मेटाबॉलिज्म, कनेक्टिव टिश्यू और ऊर्जा उत्पादन से जुड़े एंजाइम्स के सामान्य काम के लिए जरूरी है।
अगर तांबे के पानी के सेवन से आपको कोई परेशानी नहीं होती, तो सुबह खाली पेट थोड़ी मात्रा में तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना फायदेमंद हो सकता है।
तांबा शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, कॉपर शरीर में ऊर्जा उत्पादन, आयरन यूज, कनेक्टिव टिश्यू और एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम्स के सामान्य काम में मदद करता है।
तांबे के साफ बर्तन में रात को सामान्य पीने का पानी भरकर रखें। सुबह पानी को पिएं। बहुत लंबे समय तक पानी रखने की जरूरत नहीं है।
तांबे का पानी सामान्य हाइड्रेशन के लिए जितना पानी शरीर को चाहिए, उतना ही पिएं। ज्यादा कॉपर पाने के लिए बार-बार तांबे का पानी पीना सही नहीं है।
तांबे के बर्तन के अंदर जमा परत या गंदगी को नजरअंदाज न करें। इस्तेमाल के बाद बर्तन को अच्छी तरह धोकर सुखाएं। बर्तन में हरी या नीली परत दिखाई दे, तो उसे साफ तुरंत साफ करें।
तांबे के पानी से मिलने वाला कॉपर शरीर की जरूरत का केवल एक हिस्सा होता है। इसे सामान्य हाइड्रेशन हैबिट की तरह लें।