रीता राय सागर
गणेश जी की पूजा और विसर्जन के दौरान आपने भी खूब सुना होगा- 'गणपति बप्पा मोरया'। लेकिन क्या कभी सोचा है कि आखिर मोरया शब्द आया कहां से?
महाराष्ट्र में 'बप्पा' शब्द पिता या पिता जैसे व्यक्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भक्त भगवान गणेश को अपना पालनहार और पिता मानकर प्यार से 'गणपति बप्पा' कहते हैं।
मोरया का संबंध मोरया गोसावी नाम के भगवान गणेश के परम भक्त से जुड़ा है। उनकी भक्ति की कहानी महाराष्ट्र के चिंचवड़ और मोरगांव में मिलती है।
कहा जाता है कि मोरया गोसावी गणेश चतुर्थी पर चिंचवड़ से मोरगांव जाकर मयूरेश्वर गणेश जी के दर्शन करते थे। बढ़ती उम्र में भी उनकी भक्ति और यात्रा जारी रही।
कथा के अनुसार, जब मोरया गोसावी को मोरगांव जाने में मुश्किल होने लगी, तो गणेश जी उनके सपने में आए। उन्हें बताया गया कि अब उन्हें दूर आने की जरूरत नहीं है, बप्पा खुद उनके पास आएंगे।
अगले दिन स्नान के दौरान मोरया गोसावी को गणेश जी की प्रतिमा मिली। इसके बाद उन्होंने चिंचवड़ में उस प्रतिमा की स्थापना की और वहीं पूजा करने लगे।
मोरया गोसावी का नाम गणेश भक्ति से इस तरह जुड़ गया कि भक्त और भगवान को एक ही नाम से याद किया जाने लगा। यहीं से मोरया नाम गणपति के जयकारे के साथ हमेशा के लिए जुड़ गई।
एक मान्यता गणेश जी के मयूरेश्वर रूप से भी जुड़ी है। गणेश पुराण की कथा के अनुसार गणेश जी ने मयूर को वाहन बनाया था, इसलिए मोरगांव के गणेश को मयूरेश्वर या मोरेश्वर कहा जाता है।
आज जब भक्त गणपति बप्पा मोरया बोलते हैं, तो इसमें बप्पा के प्रति प्यार के साथ मोरया गोसावी की गहरी गणेश भक्ति की याद भी जुड़ी हुई है।
गणेश उत्सव के दौरान यह जयकारा स्वागत से लेकर विसर्जन तक सुनाई देता है। इसके पीछे भगवान गणेश के प्रति प्रेम और भक्त व भगवान के गहरे रिश्ते की भावना छिपी है।