रीता राय सागर
21 दूर्वा से लेकर 21 मोदक तक, जानिए क्यों बप्पा को अर्पित की जाती है ये खास संख्या।
धार्मिक मान्यताओं में 21 को पूर्णता और पूरे अस्तित्व का प्रतीक माना जाता है। इसे शरीर, मन और जीवन के अलग-अलग तत्वों से जोड़कर देखा जाता है।
बप्पा को 21 दूर्वा चढ़ाए बिना उनकी पूजा पूर्कीण नहीं मानी जाती है। मान्यता है कि दूर्वा भगवान गणेश को प्रिय है और इसे अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं।
मान्यता है कि अनलासुर नामक दैत्य को निगलने के बाद गणेश जी के शरीर में तेज गर्मी होने लगी थी। तब 21 दूर्वा की गांठें अर्पित करने से उनकी जलन शांत हुई।
गणेश जी को मोदक बेहद प्रिय है। गणेश पूजा में 21 मोदक का भोग लगाने की परंपरा भी इसी धार्मिक मान्यता से जुड़ी है।
एक बार देवी अनुसूया ने बाल गणेश को मोदक खिलाया। मोदक खाने के बाद गणेश जी पूरी तरह भोजन से तृप्त हुए। इसके बाद 21 मोदक चढ़ाने की परंपरा शुरु हुई।
गणपति को अलग-अलग पवित्र पत्र अर्पित करने की परंपरा है। इनमें शमी और बेलपत्र जैसे पत्र शामिल होते हैं। मान्यता है कि हर पत्र के साथ गणेश जी के अलग रूप का स्मरण किया जाता है।
21 दूर्वा, 21 पत्र या 21 मोदक अर्पित करने का भाव व्यक्ति के शरीर, मन और जीवन को गणपति के चरणों में समर्पित करना माना जाता है।
गणेश जी से जुड़ी 21 संख्या की मान्यता हमें पूजा के साथ समर्पण और श्रद्धा का भाव भी समझाती हैं।
गणपति बप्पा मोरया!