रीता राय सागर
एक परफ्यूम 500 रुपये में, तो दूसरा 5000 रुपये या उससे भी ज्यादा का क्यों होता है? इसकी वजह सिर्फ ब्रांड नेम नहीं है। कई चीजें मिलकर परफ्यूम की कीमत तय करती हैं।
परफ्यूम में इस्तेमाल होने वाले खुशबूदार सामग्री उसकी कीमत तय करती हैं। कुछ सिंथेटिक सामग्री किफायती होती हैं, जबकि कुछ नेचुरल एक्सट्रैक्ट और अरोमा मटीरियल महंगे होते हैं।
हर परफ्यूम में खुशबूदार तेल की मात्रा अलग होती है। Eau de Toilette की तुलना में Eau de Parfum में फ्रेगरेंस कॉन्सनट्रेशन ज्यादा हो सकती है। यह इसकी एक्सपायरी तय करती है।
महंगे परफ्यूम हमेशा ज्यादा देर तक टिकेंगे, ऐसा जरूरी नहीं है। लेकिन उनकी खुशबू का फॉर्मूला और इस्तेमाल किए गए इंग्रिडिएंट्स यह तय करते हैं।
एक परफ्यूम की खुशबू में अच्छे फ्रेगरेंस का फॉर्मूला अलग-अलग नोट्स में समय के साथ खुलते हैं- पहले टॉप नोट्स, फिर मिडिल और अंत में बेस
भारी कांच की बोतल, सुंदर कैप, प्रीमियम पैकेजिंग की लागत भी परफ्यूम की कीमत को बढ़ाती है।
ब्रांड की पहचान, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन भी कीमत को प्रभावित करते हैं। लग्जरी फ्रेगरेंस ब्रांड अपने प्रोडक्ट को प्रीमियम कैटेगरी में रखते हैं।
महंगा परफ्यूम आपकी पसंद के हिसाब से बेहतर लग सकता है। यह चॉइस, स्किन रिएक्शन और परफ्यूम के टिके रहने पर निर्भर करता है।
सिर्फ कीमत देखकर परफ्यूम न चुनें। फ्रेगरेंस, कॉन्संट्रेशन, लॉन्जेविटी, सामग्री और अपनी पसंद को ध्यान में रखते हुए चुनाव करें। खरीदने से पहले स्किन पर टेस्ट करें।