सिमरन सिंह
AI और ब्रेन टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है, लेकिन क्या किसी खास पुरानी याद को हमेशा के लिए मिटाना संभव है?
फिलहाल वैज्ञानिक किसी खास याद को पहचानकर उसे कंप्यूटर की फाइल की तरह सीधे डिलीट नहीं कर सकते।
यादें किसी एक जगह सेव नहीं होतीं। इन्हें बनाने में दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्शन और गतिविधियां शामिल होती हैं।
किसी अनुभव के दौरान न्यूरॉन्स के बीच गतिविधियां और कनेक्शन बदलते हैं। यही प्रक्रिया यादों को बनाने और बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दिमाग से मिलने वाले संकेतों में पैटर्न पहचान सकता है। इससे वैज्ञानिक ब्रेन एक्टिविटी को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश कर रहे हैं।
Brain-Computer Interface यानी BCI तकनीक दिमाग की गतिविधियों से जुड़े संकेतों को कंप्यूटर तक पहुंचाने में मदद करती है।
BCI और AI दिमाग की गतिविधियों को समझने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की पुरानी याद को मनमाने तरीके से मिटाना अभी संभव नहीं है।
कुछ यादें वक्त के साथ कम स्पष्ट हो सकती हैं या उनका भावनात्मक असर बदल सकता है। लेकिन इसे किसी फाइल को डिलीट करने जैसा नहीं माना जा सकता।
भविष्य में वैज्ञानिक यादों से जुड़ी दिमागी प्रक्रियाओं को ज्यादा गहराई से समझ सकते हैं। इससे यादों को प्रभावित करने की क्षमता बढ़ सकती है, लेकिन पूरी तरह मिटाना अब भी बड़ी चुनौती है।
AI और ब्रेन टेक्नोलॉजी यादों को समझने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं, लेकिन किसी खास पुरानी याद को चुनकर हमेशा के लिए मिटा देना फिलहाल संभव नहीं है।