अंकिता पटेल
BRICS दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण सहयोग मंच है। इसमें फिलहाल 11 सदस्य देश शामिल हैं। यह समूह आर्थिक, राजनीतिक और वैश्विक मुद्दों पर आपसी सहयोग और समन्वय बढ़ाने के लिए काम करता है।
BRICS नाम पांच मूल सदस्य देशों के अंग्रेजी नामों के शुरुआती अक्षरों से बना है-B यानी Brazil, R यानी Russia, I यानी India, C यानी China और S यानी South Africa। शुरुआत में इसे BRIC कहा जाता था।
BRIC के रूप में चार देशों के बीच सहयोग आगे बढ़ा। 2006 में समूह के गठन की प्रक्रिया मजबूत हुई और 2009 में पहला BRIC शिखर सम्मेलन रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ। 2011 में South Africa के जुड़ने के बाद BRIC का नाम BRICS हो गया।
आज BRICS में Brazil, Russia, India, China, South Africa के अलावा Egypt, Ethiopia, Iran, Saudi Arabia, UAE और Indonesia शामिल हैं।
🇧🇷 Brazil, 🇷🇺 Russia, 🇮🇳 India, 🇨🇳 China, 🇿🇦 South Africa, इसके सदस्य देशों के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से मिलकर बना है।
BRICS का बड़ा उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को मजबूत करना है।
BRICS का सहयोग केवल व्यापार या पैसे तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीक, कृषि, पर्यावरण, ऊर्जा, श्रम, आपदा प्रबंधन और कई अन्य क्षेत्रों में भी सदस्य देश मिलकर काम करते हैं।
BRICS खुद को Global South के देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक समन्वय के मंच के रूप में देखता है। इसका उद्देश्य विकासशील देशों की भूमिका को मजबूत करना भी है।
BRICS में पूर्ण सदस्य देशों के अलावा Partner Country की व्यवस्था भी है। यह व्यवस्था 2024 में बनाई गई थी। Partner देशों को कुछ बैठकों में भाग लेने का अवसर मिलता है।
भारत के लिए BRICS आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर अन्य प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संवाद का महत्वपूर्ण मंच है। व्यापार, विकास में सक्रिय भूमिका निभाता है।