Bichhiya Spiritual Meaning: बिछिया पहनने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, कौन-सा दिन है सबसे शुभ ?

अंकिता पटेल

सुहाग की निशानी है बिछिया

भारतीय परंपरा में चांदी की बिछिया विवाहित महिलाओं के श्रृंगार का अहम हिस्सा मानी जाती है। इसे दोनों पैरों की दूसरी उंगली में पहना जाता है, और यह सुहाग का प्रतीक समझी जाती है।

सुहाग की निशानी है बिछिया | source: Pinterest

शुभ मुहूर्त का रखा जाता है ध्यान

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, किसी भी नई चीज की शुरुआत शुभ मुहूर्त में करना बेहतर माना जाता है। इसलिए विवाह के समय पंडित या ज्योतिषी से सलाह लेकर ही बिछिया पहनाने का समय तय किया जाता है।

शुभ मुहूर्त का रखा जाता है ध्यान | source: Pinterest

शादी के दिन पहली बिछिया

परंपरा के अनुसार, दुल्हन को सबसे पहली बिछिया उसकी शादी के दिन ही पहनाई जाती है, आमतौर पर यह रस्म सुहागरात से पहले या विवाह की अन्य रस्मों के दौरान पूरी की जाती है।

शादी के दिन पहली बिछिया | source: Pinterest

गुरुवार है शुभ दिन

पारंपरिक मान्यताओं में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति ग्रह से जुड़ा माना जाता है, इसलिए नई ज्वेलरी या बिछिया पहनने के लिए इस दिन को अक्सर शुभ माना जाता है।

गुरुवार है शुभ दिन | source: Pinterest

सोमवार भी है एक अच्छा विकल्प

कुछ मान्यताओं के अनुसार सोमवार का दिन भी नई शुरुआत और श्रृंगार से जुड़ी चीजों के लिए अनुकूल माना जाता है, खासतौर पर अगर व्यक्ति चंद्रमा से जुड़े शुभ प्रभाव में विश्वास रखता हो।

सोमवार भी है एक अच्छा विकल्प | source: Pinterest

अक्षय तृतीया शुभ

अक्षय तृतीया, धनतेरस और दिवाली जैसे शुभ अवसरों को भी नई ज्वेलरी और बिछिया पहनने के लिए खास माना जाता है, क्योंकि इन दिनों किए गए कार्यों को स्थायी और शुभ फलदायक समझा जाता है।

अक्षय तृतीया शुभ | source: Pinterest

चांदी को ही क्यों चुना जाता है

बिछिया के लिए खासतौर पर चांदी धातु को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि यह एक अच्छा कंडक्टर मानी जाती है। चांदी शरीर के भीतर ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित रखने में मदद करती है।

चांदी को ही क्यों चुना जाता है | source: Pinterest

ज्योतिष सलाह भी है जरूरी

हर व्यक्ति की जन्म कुंडली अलग होती है, इसलिए कई लोग बिछिया पहनने का सही दिन तय करने के लिए अपने व्यक्तिगत ज्योतिषी से सलाह लेना बेहतर समझते हैं।

ज्योतिष सलाह भी है जरूरी | source: Pinterest

आस्था के साथ निभाई जाती है यह परंपरा

आखिरकार, बिछिया पहनने का दिन चुनना पूरी तरह व्यक्ति की आस्था, पारिवारिक परंपरा और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों पर निर्भर करता है।

आस्था के साथ निभाई जाती है यह परंपरा | source: Pinterest

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