Highlights:
जाकिर नाइक ने तालिबान के शिक्षा प्रतिबंधों को अस्थायी बताते हुए किया बचाव।
मलाला यूसुफजई के पिता ने बयान को बेहद चिंताजनक और निराशाजनक बताया।
यूनिसेफ के मुताबिक, अफगानिस्तान में 26 लाख से ज्यादा लड़कियां माध्यमिक शिक्षा से वंचित हैं।
Taliban Ban on Girls Education in Afghanistan: विवादित भारतीय इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पर तालिबान के प्रतिबंधों का बचाव कर विवादों में घिर गए हैं। उनके बयान की भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और आम नागरिकों ने कड़ी आलोचना की है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में जाकिर नाइक ने दावा किया कि अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा को लेकर मीडिया में दिखाई जाने वाली खबरें पूरी तरह सही नहीं हैं।
नाइक ने कहा, ''मीडिया में जो कुछ भी आता है, वह सब सच नहीं होता। अगर किसी को सही शिक्षक मिलने तक शिक्षा में देरी करनी पड़े तो इसमें कोई समस्या नहीं है।'' उन्होंने तालिबान प्रशासन का बचाव करते हुए कहा कि वहां लड़कियों की माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर केवल तब तक रोक लगाई गई है, जब तक सुरक्षित माहौल तैयार नहीं हो जाता।
उन्होंने दावा किया कि अफगानिस्तान में छठी कक्षा तक लड़कियों की प्राथमिक शिक्षा जारी है, जबकि महिला शिक्षकों की कमी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण उच्च शिक्षा रोक दी गई है। नाइक ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान की महिलाएं इस्लामी अध्ययन और शरिया में मास्टर डिग्री तथा पीएचडी कर रही हैं।
जाकिर नाइक के बयान पर नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई के पिता ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने नाइक की टिप्पणी को बेहद चिंताजनक और निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर पहचान रखने वाले किसी इस्लामी विद्वान का तालिबान की ओर से लड़कियों को व्यवस्थित तरीके से शिक्षा से वंचित करने को सही ठहराना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि अनिश्चितकालीन प्रतिबंध को केवल अस्थायी देरी बताना और महिला शिक्षकों की कमी का हवाला देना कोई ठोस तर्क नहीं है। खासकर तब, जब यह नहीं बताया जा रहा कि महिला शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की टिप्पणियां महिलाओं पर तालिबान के अत्याचारों को जायज ठहराती हैं। गौरतलब है कि मलाला यूसुफजई को लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए आवाज उठाने पर तालिबान के हमले का सामना करना पड़ा था। उन्हें गोली मार दी गई थी।
निर्वासन में रह रहीं अफगानिस्तान की पूर्व सांसद मरियम सुलेमानखिल ने भी नाइक के बयान पर तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जाकिर नाइक के मुताबिक अफगान लड़कियों पर शिक्षा का प्रतिबंध नहीं है, बल्कि वे महिला शिक्षकों का इंतजार कर रही हैं। जबकि उन्हीं महिला शिक्षकों को तालिबान ने काम करने से रोक रखा है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए इसे डॉक्टर जाकिर नाइक का शानदार तर्क बताया।
भारतीय इतिहासकार रुचिका शर्मा ने भी नाइक की आलोचना की। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर प्रभाव रखने वाले लोगों का अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा पर लगाए गए भयावह प्रतिबंधों की खुलकर निंदा नहीं करना बेहद अनैतिक है। उन्होंने इसे दुनिया में मानवाधिकारों के सबसे गंभीर उल्लंघनों में से एक बताया।
यूनिसेफ के मुताबिक, सितंबर 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से अफगानिस्तान में 26 लाख से ज्यादा लड़कियां माध्यमिक शिक्षा से वंचित हैं। यूनिसेफ ने कहा है कि अफगानिस्तान दुनिया का एकमात्र देश है, जहां लड़कियों और महिलाओं के लिए माध्यमिक और उच्च शिक्षा प्रभावी रूप से बंद है।
यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा कि किसी देश के इतिहास में पांच साल का समय भले ही कम हो, लेकिन एक लड़की के जीवन में यह बेहद निर्णायक अवधि होती है। इस दौरान शिक्षा से वंचित रहने का असर उसके पूरे भविष्य पर पड़ सकता है।