यूरोप में गर्मी की कहर (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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भारत में 40 डिग्री नॉर्मल, तो यूरोप में 35 डिग्री तापमान में क्यों जा रही है लोगों की जान? जानिए 5 बड़े कारण

Europe Heatwave Causes: यूरोप में सिर्फ 35 डिग्री तापमान ही लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। जानिए इसके पीछे के चौंकाने वाले वैज्ञानिक, सामाजिक और उनके घरों की बनावट से जुड़े मुख्य कारण।

अक्षय साहू

Why Europe Fails at 35 Degrees: भारत में इस समय भयंकर गर्मी पड़ रही है, लेकिन यह हाल केवल भारत का नहीं है, बल्कि अपने ठंडे मौसम के लिए प्रसिद्ध यूरोपीय देशों की भी भीषण गर्मी की मार झेल रहे हैं। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन जैसे देशों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। फ्रांस में गर्मी के कारण अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि इटली ने तो पूरे देश में लोगों के दोपहर में बाहर निकलने पर ही रोक लगा दी है।

यूरोपीय देशों की सरकारें लगातार लोगों से घरों में रहने, पर्याप्त पानी पीने और धूप में बाहर न निकलने की अपील कर रहे हैं। हालांकि, भारत की तुलना में यूरोप में सूरज का कहर थोड़ा कम है। यूरोप के कई शहरों का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, यह भारतीय शहरों के मुकाबले काफी कम है। लेकिन इसने ही यूरोप के लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। आइए आपको बताते हैं कि इसके पीछे क्या कारण है? क्यों 35 डिग्री तापमान में ही यूरोप में लोगों की मौत हो रही है? इसके पीछे क्या वैज्ञानिक, सामाजिक और संरचनात्मक कारण हैं?

शरीर में गर्मी सहन करने की क्षमता

सबसे पहला कारण शरीर की गर्मी सहने की क्षमता है। यूरोप को ठंडे महाद्वीप के तौर पर जाना जाता है। यहां गर्मी के मुकाबले ठंड अधिक होती है। इसके चलते यूरोपीय देशों में रहने वाले लोगों का शरीर गर्मी के तुलना में ठंड अधिक बर्दाश्त करने में सक्षम हैं। यरोप के लोग लोगों का शरीर लंबे समय तक तेज गर्मी सहने का अभ्यस्त नहीं है। यही कारण है कि 35 डिग्री तापमान भी उनके लिए गंभीर खतरा बन जाता है।

यूरोप के अधिकतर देशों में पड़ रही भीषण गर्मी (सोर्स- सोशल मीडिया)

यूरोप में घरों की बनावट

यूरोप में अधिकतर पुराने घरों को ठंड से बचाव के नजरिए से बनाए गया थे। इन घरों की मोटी दीवारें और बंद संरचनाएं सर्दियों में गर्मी बनाए रखने का काम करती हैं। इसके अलावा आज जो नए घर बनाए जा रहे हैं उन्हें भी ऐसे ही डिजाइन किया जाता है कि घर के अंदर गर्मी बने रहे। यह ठंड के लिए तो अनुकूल हैं, लेकिन गर्मियों में यही घर हीट ट्रैप बन जाते हैं। बाहर की गर्मी अंदर फंस जाती है और रात में भी घर के अंदर का तापमान कम नहीं होता है। जो कई बार जानलेवा भी साबित होता है।

यूरोपीय देशों में एसी की कमी

भारत के शहरी इलाकों में आज एसी एक आम जरूरत बन गई है। लेकिन यूरोप के आज भी एसी को इतना जरूरी नहीं मानते है। यूरोप में बहुत कम इलाके हैं जहां एसी का इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि जहां एसी का इस्तेमाल होता भी है, वहां लोग महंगी बिजली से बचने के लिए सीमित उपयोग करते हैं। नतीजा यह है कि हीटवेव के दौरान लोगों को राहत देने वाला ठंडा वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता।

अधिक गर्मी सह नहीं सकते यूरोपीय नागरिक (सोर्स- सोशल मीडिया)

शरीर को नहीं मिल रहा आराम

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कई दिनों तक रहने वाली गर्मी सबसे ज्यादा खतरनाक होती है। अगर तापमान दिन के लिए 35 डिग्री पहुंचे तो शरीर इसे किसी तरह सहन कर सकता है, लेकिन जब यही स्थिति कई दिनों तक बनी रहती है, तो शरीर थकने लगता है। यूरोप में इस बार रात का तापमान भी कम नहीं हो रहा है। इसके चलते शरीर को रिकवरी के लिए पर्याप्त समय ही नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में नींद की कमी, थकावट, दिल और दिमाग पर अधिक दवाब पड़ता है, जो खतरनाक भी साबित होता है।

समय पर मदद न मिलना

यूरोप की एक बड़ी आबादी अकेल रहती है, इसमें काम करने वाले प्रोफेशनल लेकर रिटायर्ड बुजुर्ग भी शामिल हैं। उनके परिवार के सदस्य पास नहीं होते और कई बार पड़ोसी भी नियमित हालचाल नहीं लेते। ऐसे में डिहाइड्रेशन या हीट स्ट्रोक धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेते हैं। समय पर मदद न मिलने से जान का खतरा बढ़ जाता है।

यूरोप में हीटवेव गंभीर समस्या (सोर्स- सोशल मीडिया)

हीट वेव से कैसे करें बचाव

डॉक्टरों के अनुसार, हीट वेव में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है। पहले डिहाइड्रेशन होता है, फिर चक्कर, कमजोरी, उल्टी और तेज धड़कन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। यदि समय पर इलाज न मिले, तो हीट स्ट्रोक हो सकता है, जो जानलेवा स्थिति है।

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