Trump Tariff on India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत के लिए एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए 25% अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की। यह कदम भारत द्वारा रूस से सस्ते दरों पर कच्चा तेल खरीदने के कारण उठाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय ट्रंप की नाराजगी को दर्शाता है।
साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल कुगलमैन ने इसे भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों के लिए पिछले 20 वर्षों का सबसे गंभीर संकट बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी इस समय सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है और यदि स्थिति सुधरी नहीं, तो द्विपक्षीय संबंध और भी बिगड़ सकते हैं।
कुगलमैन ने कहा कि पिछले कुछ समय से दोनों देशों के संबंधों में जो तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, उसे देखते हुए ट्रंप का यह नया निर्णय कोई चौंकाने वाला नहीं है। हालांकि इसके नकारात्मक परिणाम होंगे, लेकिन मुझे यह बिल्कुल आश्चर्यजनक नहीं लगता कि राष्ट्रपति ने अपनी चेतावनी को अमल में ला ही दिया।
राष्ट्रपति ट्रंप भारत जैसे अपने करीबी सहयोगी देशों पर भी बिना हिचक दबाव बनाने से नहीं कतराते। उनकी मांग है कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करे, क्योंकि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध में सहायता मिलती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका और भारत के संबंध कई क्षेत्रों में फैले हुए हैं और दोनों देश विभिन्न मोर्चों पर एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ऐसे में, द्विपक्षीय संबंधों में कभी-कभी मतभेद या उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है।
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जब यह सवाल उठा कि रूस से लगातार कच्चा तेल खरीदने पर ट्रंप ने चीन को नहीं, बल्कि भारत को ही सजा क्यों दी, तो कुगलमैन ने जवाब में कहा, "भारत ने जो कार्रवाई की, वह चीन ने नहीं की। चीन ने सीजफायर कराने में ट्रंप की भूमिका पर सवाल नहीं उठाए, लेकिन भारत ने उठाए। इसीलिए मेरा मानना है कि ट्रंप ने व्यापार के बहाने भारत से अपनी नाराजगी निकाली है। यह एकदम साफ दोहरा मापदंड है। आप इसे कुछ भी कह सकते हैं।