नरेन्द्र मोदी और पुतिन ( AI Generated Photo) 
विदेश

यूक्रेनी हमलों से रूस में पेट्रोल का हाहाकार, पुतिन ने भारत से मांगी मदद, क्या तेल संकट में फंसा मास्को?

Russia Fuel Crisis: यूक्रेन के भीषण ड्रोन हमलों के बाद रूस की रिफाइनरिंग क्षमता 40% तक ठप हो गई है। ईंधन की भारी कमी से निपटने के लिए रूस ने अब भारतीय रिफाइनरियों से अतिरिक्त पेट्रोल की गुहार लगाई है।

अमन उपाध्याय

Russia Fuel Crisis After Ukraine Attack: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बेहद हैरान करने वाला और ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है। दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादकों में से एक माना जाने वाला रूस, आज अपने ही देश में गहराते ईंधन संकट से निपटने के लिए भारतीय रिफाइनरियों का दरवाजा खटखटा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने अपने देश में पेट्रोल की भारी कमी को दूर करने के लिए भारत से अतिरिक्त पेट्रोल आपूर्ति के लिए संपर्क साधा है।

यूक्रेनी हमलों ने तोड़ी रूस की कमर

इस संकट की मुख्य वजह यूक्रेन द्वारा रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर किए गए 'सरप्राइज अटैक' हैं। पिछले कुछ समय में यूक्रेनी ड्रोन और मिसाइल हमलों ने रूस के रिफाइनिंग नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे वहां हाल के वर्षों का सबसे भीषण पेट्रोल संकट पैदा हो गया है।

बताया जा रहा है कि इन हमलों के कारण रूस की लगभग 40 प्रतिशत रिफाइनिंग क्षमता फिलहाल ठप पड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे और हमले नहीं होते हैं, तब भी इस व्यवस्था को सामान्य होने में कम से कम दो महीने का समय लग सकता है।

इन दिग्गज रूसी कंपनियों ने किया संपर्क

सूत्रों के अनुसार, रूस की प्रमुख ऊर्जा कंपनियां रोसनेफ्ट, गजप्रोम नेफ्ट और लुकोइल भारतीय रिफाइनरों के साथ अतिरिक्त पेट्रोल आपूर्ति को लेकर सक्रिय बातचीत कर रही हैं। इन कंपनियों ने भारत की सरकारी और निजी, दोनों ही प्रकार की रिफाइनरियों से मदद मांगी है। हालांकि, यह आपूर्ति सीधी न होकर अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग कंपनियों के माध्यम से होने की संभावना है।

भारत ने क्या दी प्रतिक्रिया

रूस के इस अनुरोध पर भारत की स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। सरकारी क्षेत्र की तीन प्रमुख रिफाइनरियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उन्हें रूसी कंपनियों से अनुरोध तो मिले हैं लेकिन वर्तमान में उनके पास निर्यात के लिए अतिरिक्त पेट्रोल उपलब्ध नहीं है।

फिलहाल इन तीनों कंपनियों ने इस संवेदनशील मामले पर कोई भी आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में बताया था कि भारतीय कंपनियां रूस को सीधे ईंधन की आपूर्ति नहीं कर रही हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ट्रेडर्स के माध्यम से भारतीय मूल का ईंधन रूसी खरीदारों तक पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि यूक्रेन के हमले इसी तरह जारी रहे, तो आने वाले समय में रूस के लिए न केवल पेट्रोल, बल्कि डीजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना भी एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाएगा। रूस का भारत से ईंधन मांगना यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि युद्ध ने रूसी अर्थव्यवस्था के सबसे मजबूत स्तंभ 'ऊर्जा क्षेत्र' को कितनी गहराई तक प्रभावित किया है।

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