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पाकिस्तान का अमेरिका पर साइबर हमला! समय रहते FBI ने लिया बड़ा एक्शन; सर्वर हुआ जब्त

Cyber Scam: अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई और न्याय विभाग ने पाकिस्तान से संचालित एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के दौरान 39 वेबसाइटों और उनके सर्वरों को जब्त कर लिया गया।

अमन उपाध्याय

नवभारत इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई (FBI) ने एक महत्वपूर्ण खुलासा करते हुए बताया कि अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) ने पाकिस्तान से संचालित एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की है। इस अभियान के दौरान 39 साइबर अपराधी वेबसाइटों और उनके सर्वरों को जब्त कर लिया गया। एफबीआई ने इस ऑपरेशन की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, इस गिरोह का प्रमुख सैम रजा नामक व्यक्ति है, जो पाकिस्तान में रहता है और डार्कवेब पर "हार्टसेंडर" के नाम से जाना जाता है। यह साइबर अपराधी वर्ष 2020 से ऑनलाइन हैकिंग टूल्स और धोखाधड़ी से संबंधित वेबसाइटों की बिक्री में शामिल था। इन टूल्स का उपयोग फिशिंग हमलों, पहचान की चोरी और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसी अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता था।

ऑनलाइन धोखाधड़ी का बनाया शिकार

FBI की जांच में खुलासा हुआ है कि एक साइबर अपराधी गिरोह ने अमेरिका में हजारों लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार बनाया है। इस गिरोह की गतिविधियों के कारण अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को करीब 30 लाख डॉलर (लगभग 25 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। ये अपराधी न केवल फर्जी वेबसाइटों के जरिए फिशिंग अटैक कर रहे थे, बल्कि 'स्कैम पेज' भी बेच रहे थे, जिनका इस्तेमाल अन्य साइबर ठग ऑनलाइन ठगी के लिए कर रहे थे।

अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान से जुड़े एक साइबर गिरोह ने उन्नत टूल्स का उपयोग कर बड़ी कंपनियों को धोखा दिया और उनके फंड को फर्जी खातों में ट्रांसफर कराया। इसके अलावा, यह गिरोह लोगों की व्यक्तिगत जानकारी चुराकर बड़े घोटाले करने में भी शामिल था। इस ऑपरेशन में अमेरिका को नीदरलैंड की पुलिस का भी सहयोग मिला। दोनों देशों की एजेंसियों ने मिलकर इस साइबर गिरोह के नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया और उनके सर्वरों को जब्त कर लिया।

यूट्यूब के जरिए  ट्रेनिंग

जांच में खुलासा हुआ कि सैम रजा केवल साइबर अपराधों में लिप्त ही केवल लिप्त नहीं था, बल्कि यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करके अन्य अपराधियों को भी ट्रेनिंग देता था। वह अपने हैकिंग टूल्स के उपयोग के तरीके सिखाता था, जिससे लोगों को आसानी से ठगा जा सकता था। ये टूल्स इतने उन्नत और खतरनाक थे कि वे किसी भी सिक्योरिटी सिस्टम और एंटीवायरस को आसानी से धोखा देने में सक्षम थे। अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले में आगे भी कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है ताकि भविष्य में ऐसे साइबर अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सके।

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