Pakistan Army ISPR On Operation Sindoor: 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली बरसी के पर सीमा के उस पार से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पाकिस्तानी सेना के प्रॉपगैंडा विंग, इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इस पूरे सैन्य घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा है। इस दौरान पाकिस्तानी सेना ने न केवल भारत के दावों को चुनौती दी बल्कि ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में चलाए गए अपने अभियान 'मरका-ए-हक' को एक बड़ी रणनीतिक सफलता भी बताया।
ISPR के डायरेक्टर जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध के खतरे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दो ऐसे पड़ोसी देश जिनके पास परमाणु हथियार हों, उनके बीच युद्ध की बात करना बेवकूफी है। चौधरी के मुताबिक, जो लोग भी इन हालातों में पूरी तरह से युद्ध होने की उम्मीद करते हैं। उन्हें असलियत का अंदाजा नहीं है। उन्होंने तनाव के समय पाकिस्तान के सब्र और समझदारी की तारीफ करते हुए खुद को शांति का संदेश देने वाला दिखाने की कोशिश की।
पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों ने यह दावा किया कि भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के बदले में उन्होंने 'मरका-ए-हक' (जिसे बाद में ऑपरेशन 'बुन्यानुम मरसूस' कहा गया) नाम का एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया था। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने दावा किया कि इस टकराव के 10 बड़े रणनीतिक नतीजे निकले हैं। उन्होंने कहा कि इस जवाबी कार्रवाई ने भारत के उस वैश्विक प्रचार को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिसमें पाकिस्तान को आतंकवाद की जड़ बताया जाता था। उनके मुताबिक, भारत बिना किसी पक्के सबूत के पाकिस्तान पर इल्जाम लगाता रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तानी सेना ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की बात करते हुए भारत से सबूत मांगे। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता (DG ISPR) ने सख्त लहजे में कहा कि एक साल होने के बाद भी भारत ने कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय सेना पर राजनीति से प्रेरित होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सेना के नेतृत्व में राजनीति का दखल खतरनाक है और इससे बड़े सैन्य अधिकारियों की छवि खराब होती है।
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उन्होंने यह दावा भी किया कि उनके ऑपरेशन 'मरका-ए-हक' ने यह दिखा दिया है कि इस इलाके में शांति बनाए रखने वाला मुख्य देश पाकिस्तान ही है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में नौसेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिन्होंने संयुक्त रूप से यह संदेश देने का प्रयास किया कि पाकिस्तानी सेना किसी भी भारतीय चुनौती का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।