Iran IRGC Threat US Assets: मीडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने रविवार को खुले तौर पर चेतावनी दी है कि यदि उसके तेल टैंकरों या व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो वह इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और दुश्मन के जहाजों पर भीषण हमला करेगी। यह धमकी खाड़ी क्षेत्र में हाल ही में हुए उन हमलों के बाद आई है, जहां ओमान की खाड़ी में दो ईरानी टैंकरों को निशाना बनाया गया था।
ईरानी मीडिया के अनुसार IRGC ने चेतावनी दी है कि वे अपने व्यापारिक हितों या ऊर्जा सुरक्षा पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेंगे और ईरानी संपत्तियों को निशाना बनाए जाने पर वे इसका जोरदार जवाब देंगे। उन्होंने साफ़ किया है कि इस जवाबी कार्रवाई की सीधी मार क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पड़ सकती है, जिससे वाशिंगटन और तेहरान के बीच पहले से ही नाजुक चल रहे तनाव के और अधिक बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अक्रामिनिया ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि जो देश ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन कर रहे हैं, उनके जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, ईरानी सांसद अब एक ऐसा विधेयक तैयार कर रहे हैं जो होर्मुज के प्रबंधन को औपचारिक रूप देगा, जिसमें शत्रु देशों के जहाजों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
इसी तनाव के बीच, कतर की राजधानी दोहा से लगभग 23 समुद्री मील दूर एक मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किए जाने की खबर मिली है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, इस हमले के कारण जहाज पर मामूली आग लग गई थी, जिसे बुझा लिया गया है। गनीमत रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है।
क्षेत्र में बढ़ती असुरक्षा को देखते हुए, ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय मिशन से पहले ही मीडिल ईस्ट में एक डिस्ट्रॉयर भेजने की घोषणा की है ताकि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा की जा सके। 28 फरवरी से शुरू हुए इस तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है, जिसने दुनिया भर के बाजारों को अस्थिर कर दिया है।