ईरान में 'इस्लामिक शासन' के खिलाफ महासंग्राम, (डिजाइन फोटो) 
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ईरान में 'इस्लामिक शासन' के खिलाफ महासंग्राम; धीरे-धीरे 27 प्रांतों में फैली आग, बैकफुट पर शासन

Iran Protests News In Hindi: ईरान में सुप्रीम लीडर खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। 27 प्रांतों के 280 स्थानों पर फैली इस बगावत में अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत की खबर है।

अमन उपाध्याय

Iran Protests Latest News In Hindi: ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की अगुवाई वाली इस्लामिक सरकार के खिलाफ गुस्सा चरम पर है। जो विरोध प्रदर्शन शुरू में छिटपुट थे, वे अब एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल चुके हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, ईरान के 31 में से 27 प्रांतों के 280 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि पिछले 24 घंटों में प्रदर्शनों की घटनाओं में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है।

हिंसा और इंटरनेट ब्लैकआउट

जैसे-जैसे प्रदर्शनों का दायरा बढ़ा, सरकार ने सुरक्षा बलों के जरिए इसे दबाने की कोशिश तेज कर दी है। तेहरान के पश्चिम में स्थित कराज (Karaj) में प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों की ओर से भारी गोलीबारी की गई। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था 'नेट ब्लॉक्स' के अनुसार, गुरुवार दोपहर के बाद पूरे ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी अचानक ठप हो गई है ताकि प्रदर्शनकारी एकजुट न हो सकें।

मौत का आंकड़ा और मानवाधिकारों का हनन

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पुष्टि की है कि इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 28 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि, मानवाधिकारों पर नजर रखने वाली अन्य संस्थाओं जैसे HRANA और 'ईरान ह्यूमन राइट्स' का दावा है कि मरने वालों की संख्या 40 से अधिक हो चुकी है। एक अनुमान के मुताबिक, सड़कों पर उतरने वाले प्रदर्शनकारियों की संख्या 11,000 के पार पहुंच गई है।

महसा अमीनी आंदोलन की यादें ताजा

विशेषज्ञ इस आंदोलन की तुलना 2022 में हुई महसा अमीनी की मौत के बाद हुए विद्रोह से कर रहे हैं। उस समय भी हिजाब और पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ पूरा ईरान सुलग उठा था। इस बार भी गुस्सा वैसा ही है, लेकिन इसका केंद्र आर्थिक बदहाली और गिरती मुद्रा (Currency) भी है। तेहरान, तबरीज, इस्फहान और मशहद जैसे बड़े शहरों के बाजारों में व्यापारियों ने गिरती अर्थव्यवस्था के खिलाफ हड़ताल शुरू कर दी है।

सरकार का रुख और 'विदेशी साजिश' का आरोप

सुप्रीम लीडर खामेनेई ने शनिवार को अपना पहला बयान जारी करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों की कुछ शिकायतें 'वाजिब' हो सकती हैं, लेकिन उन्होंने इसके पीछे 'बाहरी ताकतों' का हाथ होने का आरोप लगाया है।

हालात को काबू करने के लिए सरकार ने बुनियादी सब्सिडी बढ़ाने और सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में वृद्धि जैसे आर्थिक सुधारों का वादा किया है, लेकिन प्रदर्शनकारी अब आर्थिक सुधारों से आगे बढ़कर पूरी व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं।

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