भारत-रूस का रिश्ता, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

इतना भरोसा कैसे? 1971 से अब तक... क्यों हर संकट में रूस ही बना भारत का सबसे भरोसेमंद साथी?

India Russia Relations: पुतिन की भारत यात्रा पर एक बार फिर भारत-रूस की ऐतिहासिक दोस्ती चर्चा में है। जानिए कैसे दशकों से रणनीति, सुरक्षा और कूटनीति में रूस भारत का सबसे भरोसेमंद साथी बना हुआ है।

अमन उपाध्याय

India Russia Support: रूस और भारत की दोस्ती कोई सामान्य कूटनीतिक संबंध नहीं, बल्कि सात दशकों से बनी रणनीतिक समझ और आपसी भरोसे की मिसाल है।

पुतिन की नई दिल्ली यात्रा के दौरान एक बार फिर यह बात जोर पकड़ रही है कि भारत के लिए रूस सिर्फ एक साझेदार नहीं, बल्कि ‘बेस्ट फ्रेंड फॉरएवर’ है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं जो इस रिश्ते की मजबूती को समझाते हैं।

स्वतंत्र विदेश नीति को पहली बार सहारा

ब्रिटिश शासन से मुक्त होने के बाद भारत की सबसे बड़ी चुनौती थी किसी महाशक्ति के दबाव में न आना। अमेरिका उस दौर में ब्रिटेन का नज़दीकी सहयोगी था और भारत को आशंका थी कि कहीं नए प्रकार का प्रभुत्व न उभर आए। ऐसे समय में सोवियत संघ (आज का रूस) ने भारत को रणनीतिक स्पेस दिया। भारत की गुटनिरपेक्ष नीति का सम्मान करते हुए रूस ने हर स्तर पर समर्थन दिया। यह वह दौर था जब भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति की नींव रख रहा था, और रूस उसका पहला बड़ा सहायक बना।

1971 भारत-पाक युद्ध में रूस का निर्णायक समर्थन

भारत-रूस रिश्ते की सबसे बड़ी परीक्षा 1971 के युद्ध में हुई। बांग्लादेश मुक्ति संघर्ष के समय भारत शरणार्थियों के दबाव से जूझ रहा था और पाकिस्तान पूर्वी बंगाल में अत्याचार कर रहा था। जब अमेरिका ने पाकिस्तान के समर्थन में अपना 7वां नौसैनिक बेड़ा बंगाल की खाड़ी में भेजा, तब सोवियत नौसेना भारत की ढाल बनकर सामने आई। रूस का यह हस्तक्षेप भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ और भारत की जनता के मन में रूस की “मुसीबत में साथ देने वाले दोस्त” वाली छवि हमेशा के लिए दर्ज हो गई।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के हितों का सबसे बड़ा रक्षक

यूएन सुरक्षा परिषद में जब-जब भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा, रूस सबसे आगे खड़ा दिखा। सोवियत संघ ने अब तक चार बार वीटो का प्रयोग कर भारत को महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकटों से बचाया है। सबसे यादगार उदाहरण है 1961 में गोवा मुक्ति अभियान। अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने भारत की आलोचना की और पुर्तगाल ने यूएन में शिकायत दर्ज की। लेकिन सोवियत संघ ने वीटो कर साफ कहा भारत का कदम पूरी तरह जायज है। इसके साथ ही कश्मीर से जुड़े प्रस्ताव हों या दक्षिण एशिया में तनाव पैदा करने वाले मुद्दे रूस लगातार भारत के हितों की रक्षा करता रहा।

भारत की रक्षा क्षमता में अहम रोल

भारत की रक्षा क्षमता में रूस की भूमिका बेहद अहम है। भारतीय वायुसेना के प्रमुख के युद्धक प्लेटफ़ॉर्म जिसमें सुखोई-30 MKI, मिग-29, मिग-21 यह सब रूस की तकनीक पर आधारित हैं। इसके साथ ही थलसेना के टैंक, नौसेना की पनडुब्बियां, मिसाइल सिस्टम से लेकर एयर-डिफेंस तक-रूसी तकनीक भारत की सैन्य रीढ़ मानी जाती है। दोनों देश मिलकर ब्रहमोस जैसी मिसाइलें भी बनाते हैं, जो दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है।

रूस की छवि सबसे सकारात्मक

2023 की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत दुनिया का एकमात्र देश है जहां 57% लोग रूस को सकारात्मक रूप से देखते हैं। यह तब है जब भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध में तटस्थ रुख अपनाया। यह आंकड़ा दिखाता है कि आम भारतीय रूस को भरोसेमंद और दोस्ताना राष्ट्र मानते हैं एक ऐसा देश जिसने दशकों से भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं का सम्मान किया है।

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