Red Sea Oil Route Explained: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक नई और गंभीर चुनौती उभर कर सामने आई है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी करने की चेतावनी दी है। यह धमकी न केवल सऊदी अरब के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और वैश्विक तेल बाजार के लिए एक खतरे की घंटी है।
विशेषज्ञों और अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यदि यह नाकाबंदी हकीकत में बदलती है, तो यह ईरान के साथ जारी युद्ध को और बड़ा बना सकती है और अमेरिकी सेना के संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाल सकती है।
सोमवार को यमन के हूती विद्रोहियों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वे सऊदी अरब के बंदरगाहों पर किसी भी जहाज को सामान लादने या उतारने की अनुमति नहीं देंगे। इस कदम का सीधा उद्देश्य सऊदी तेल निर्यात को रोकना है। लाल सागर, जो वैश्विक व्यापार के लिए एक जीवन रेखा माना जाता है, इस क्षेत्र में हूतियों की सक्रियता से पहले ही अस्थिर है, लेकिन सऊदी बंदरगाहों को निशाना बनाने की यह नई घोषणा संघर्ष को एक अलग स्तर पर ले जा सकती है।
सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में से एक है। यदि हूती अपने दावे के अनुसार सऊदी बंदरगाहों को ब्लॉक करने में सफल होते हैं, तो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 7% हिस्सा पूरी तरह से ठप हो सकता है। तेल की इतनी बड़ी मात्रा में कटौती से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यदि ऐसी कोई स्थिति बनती है, तो अमेरिका इससे निपट लेगा। उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिका पहले भी हूतियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और पूर्व पेंटागन अधिकारियों के अनुसार, जमीनी हकीकत उतनी सरल नहीं है।
वर्तमान में अमेरिकी सेना के पास क्षेत्र में पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन वे पहले से ही ईरान के खिलाफ सक्रिय हैं और खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी में लगे हुए हैं। हूतियों के खिलाफ दूसरा मोर्चा खोलने का मतलब होगा अपनी सैन्य शक्ति को दो हिस्सों में बांटना। जिससे अमेरिका के सामने कई संकट खड़े हो सकते हैं। जिनमें ये मुख्य बिंदु है:
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हूती विद्रोहियों को एक सख्त और फुर्तीले लड़ाके के रूप में जाना जाता है। उन्होंने पिछले कई वर्षों में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और अमेरिका के भीषण बमबारी का सामना किया है। पिछले साल भी अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ दो विमानवाहक पोत, लड़ाकू जेट और B-2 रणनीतिक हमलावर विमानों का उपयोग किया था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतने भारी हमले भी हूतियों की जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाए।