अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान में सत्ता परिवर्तन की तैयारी? ट्रंप का बड़ा बयान, मिडिल ईस्ट में हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात

Iran Regime Change: ट्रंप ने ईरान में 'रेजीम चेंज' को बेहतर विकल्प बताया है। हजारों अमेरिकी सैनिकों और एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती से मिडिल ईस्ट में बड़े सैन्य संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।

प्रिया सिंह

Potential US Military Operation In Iran: ईरान के साथ जारी परमाणु वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अत्यंत गंभीर और चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान में वर्तमान शासन का बदलना यानी 'रेजीम चेंज' दुनिया के लिए सबसे अच्छी चीज होगी। ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने भारी सैन्य जमावड़े और जंगी युद्धपोतों को भेजना शुरू कर दिया है। पेंटागन अब ईरान के खिलाफ हफ्तों तक चलने वाले एक बहुत बड़े और जटिल सैन्य अभियान की गुप्त योजना पर काम कर रहा है।

सैन्य तैनाती का विस्तार

रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट में एक और विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर और फाइटर जेट तैनात किए हैं। इन आधुनिक युद्धपोतों के साथ हजारों अतिरिक्त सैनिकों और गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर को भी सुरक्षा के लिहाज से वहां भेजा जा रहा है। पेंटागन की यह नई तैनाती हमले और रक्षा दोनों उद्देश्यों के लिए है जो पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव को चरम पर ले गई है।

रणनीति में बड़ा बदलाव

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस बार का सैन्य अभियान पिछले साल के 'मिडनाइट हैमर' ऑपरेशन से काफी बड़ा और अलग होगा। पिछला हमला केवल परमाणु ठिकानों तक सीमित था लेकिन अब ईरान के मुख्य सरकारी और सुरक्षा ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। अगर राष्ट्रपति ट्रंप इस हमले का अंतिम आदेश देते हैं तो यह अब तक का सबसे भयानक और बड़ा क्षेत्रीय संघर्ष साबित हो सकता है।

ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि किसी भी हमले का जवाब बहुत ही घातक होगा। ईरान के पास एक बहुत मजबूत मिसाइल भंडार है जो मिडिल ईस्ट में मौजूद किसी भी अमेरिकी सैन्य ठिकाने को आसानी से तबाह कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जवाबी हमलों का यह सिलसिला पूरे क्षेत्र में एक भीषण युद्ध भड़काने की पूरी क्षमता रखता है।

परमाणु वार्ता की शर्तें

ओमान में परमाणु कार्यक्रम को लेकर पिछले हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच कुछ गुप्त और महत्वपूर्ण आधिकारिक बातचीत भी हुई थी। ईरान ने प्रतिबंध हटाने के बदले परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं मानने के संकेत दिए हैं लेकिन मिसाइल प्रोग्राम पर चर्चा से मना किया है। इसी दौरान इजरायली पीएम नेतन्याहू ने भी ट्रंप से मिलकर यह मांग रखी है कि समझौता केवल इजरायल की सुरक्षा शर्तों पर हो।

विकल्प और चेतावनी

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने मीडिया को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अभी भी सभी विकल्प खुले हैं। ट्रंप पहले ही यह चेतावनी दे चुके हैं कि अगर कूटनीति से कोई समाधान नहीं निकला तो उनके पास 'दर्दनाक' विकल्प भी मौजूद हैं। पूरी दुनिया अब इसी चिंता में है कि क्या अमेरिका सीधे युद्ध का रास्ता चुनेगा या फिर कूटनीति के जरिए शांति स्थापित करेगा।

सैनिकों को संबोधन

मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिक वर्तमान में नॉर्थ कैरोलिना से आए उन निर्देशों का पालन कर रहे हैं जहां ट्रंप ने उन्हें संबोधित किया था। ट्रंप ने अपने भाषण में सैनिकों से कहा था कि कभी-कभी शांति स्थापित करने के लिए डर का माहौल बनाना भी बहुत जरूरी होता है। अमेरिकी रक्षा विभाग फिलहाल इस पूरे मामले पर कुछ भी खुलकर बोलने से बच रहा है लेकिन युद्ध की तैयारियां जोरों पर हैं।

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