चीन में कनाडाई नागरिक की मौत की सजा रद्द, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

चीन-कनाडा रिश्तों में जमी बर्फ पिघली, कनाडाई नागरिक की मौत की सजा रद्द; PM कार्नी के दौरे का दिखा असर

Robert Lloyd Schellenberg: चीन ने ड्रग तस्करी के आरोपी कनाडाई नागरिक के मौत की सजा को पलट दिया है। इसे पीएम मार्क कार्नी के हालिया बीजिंग दौरे के बाद सुधरते राजनयिक संबंधों का परिणाम माना जा रहा है।

अमन उपाध्याय

China Canada Relations: चीन और कनाडा के बीच वर्षों से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों में नरमी के संकेत मिलने लगे हैं। चीन की सर्वोच्च अदालत ने कनाडाई नागरिक रबर्ट लॉयड शेलेनबर्ग की मौत की सजा को पलट दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करने के लिए बीजिंग के साथ रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

15 साल की जेल से सीधे 'मौत की सजा'

शेलेनबर्ग को साल 2014 में नशीली दवाओं की तस्करी के आरोप में चीन के डालियान शहर से हिरासत में लिया गया था। शुरुआत में उन्हें 15 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, 2018 में कनाडा द्वारा हुवावे की मुख्य वित्तीय अधिकारी मेंग वानझू की गिरफ्तारी के बाद दोनों देशों के रिश्ते रसातल में चले गए। इसके तुरंत बाद, जनवरी 2019 में एक चीनी अदालत ने शेलेनबर्ग की सजा को बढ़ाकर मौत की सजा में बदल दिया जिसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया था।

पीएम मार्क कार्नी का 'चीन दांव'

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पिछले साल पदभार संभालने के बाद से ही चीन के साथ आर्थिक संबंधों को सुधारने पर जोर दिया है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने कनाडा की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है जिससे ओटावा अब नए निर्यात बाजारों की तलाश में है। जनवरी में कार्नी ने बीजिंग का दौरा किया और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक नई रणनीतिक साझेदारी और प्रारंभिक व्यापार समझौते की घोषणा की। शेलेनबर्ग की सजा का पलटना इसी नई दोस्ती का पहला बड़ा परिणाम माना जा रहा है।

अब आगे क्या होगा?

शेलेनबर्ग के वकील झांग डोंगशुओ ने पुष्टि की है कि चीन की सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद अब लियाओनिंग हाई पीपल्स कोर्ट द्वारा मामले की दोबारा सुनवाई की जाएगी। हालांकि सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है लेकिन वकील ने बताया कि शेलेनबर्ग अब काफी सहज महसूस कर रहे हैं। कनाडाई विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वे शेलेनबर्ग और उनके परिवार को राजनयिक सहायता देना जारी रखेंगे और मौत की सजा के खिलाफ अपनी वकालत जारी रखेंगे।

राजनयिक जीत या रणनीतिक मजबूरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि शेलेनबर्ग की सजा का रद्द होना केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। जहां एक तरफ ओटावा इसे अपने नागरिक की जान बचाने की दिशा में एक जीत के रूप में देख रहा है, वहीं बीजिंग इसे कनाडा को अमेरिका से दूर करने और अपने पाले में लाने के एक अवसर के रूप में देख रहा है।

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