चीन ब्रम्हपुत्र नदी पर बनाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा बांध, भारत की आपत्ति पर बीजिंग से आया ये जवाब 
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चीन ब्रम्हपुत्र नदी पर बनाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा बांध, भारत की आपत्ति पर बीजिंग से आया ये जवाब

चीन ने भारत की सीमा के पास तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा बांध बनाने की अपनी योजना को लेकर कहा कि प्रस्तावित परियोजना गहन वैज्ञानिक सत्यापन से गुजर चुकी है।

Saurabh Pal

बीजिंगः चीन ने भारत की सीमा के पास तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा बांध बनाने की अपनी योजना को लेकर कहा कि प्रस्तावित परियोजना गहन वैज्ञानिक सत्यापन से गुजर चुकी है। नदी प्रवाह के निचले इलाकों में स्थित भारत और बांग्लादेश पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। लगभग 13.7 अरब अमेरिकी डॉलर की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना पारिस्थितिक रूप से नाजुक हिमालयी क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट सीमा पर स्थित है, जहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं।

चीनी विदेश मंत्रालय के नए प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां प्रेस वार्ता में कहा कि यारलुंग जांगबो नदी के निचले इलाकों में जलविद्युत परियोजना पर चीन ने अपना रुख साफ कर दिया है। मैं दोहराना चाहता हूं कि परियोजना के निर्माण का निर्णय गहन वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद लिया गया तथा इस परियोजना से पारिस्थितिकी पर्यावरण, भूवैज्ञानिक स्थितियों और प्रवाह के निचले देशों के जल संसाधनों से संबंधित अधिकारों और हितों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

भारत ने बांध पर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। भारत की यात्रा पर आए अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुलिवन के साथ भारतीय अधिकारियों की वार्ता में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इस बारे में पूछे जाने पर जियाकुन ने कहा कि यह कुछ हद तक आपदा की रोकथाम और जोखिम कम करने तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में अनुकूल कदम होगा। वर्तमान में दिल्ली के दौरे पर आए सुलिवन ने सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत की। जो बाइडन प्रशासन के तहत पिछले चार वर्षों में भारत-अमेरिका वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। सुलिवन अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण से दो सप्ताह पहले भारत की यात्रा पर हैं।

पिछले महीने, चीन ने तिब्बत में भारतीय सीमा के करीब ब्रह्मपुत्र नदी पर यारलुंग जांगबो नामक एक बांध बनाने की योजना को मंजूरी दी थी। योजना के अनुसार, विशाल बांध हिमालय की पहुंच में एक विशाल घाटी पर बनाया जाएगा, जहां से ब्रह्मपुत्र अरुणाचल प्रदेश और फिर बांग्लादेश में पहुंचती है। प्रस्तावित बांध पर तीन जनवरी को अपनी पहली प्रतिक्रिया में भारत ने चीन से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि ब्रह्मपुत्र के प्रवाह वाले निचले इलाकों के हितों को ऊपरी इलाकों में होने वाली गतिविधियों से नुकसान न पहुंचे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिल्ली में मीडिया से कहा कि हम अपने हितों की रक्षा के लिए निगरानी जारी रखेंगे और आवश्यक कदम उठाएंगे। जायसवाल ने कहा कि नदी के प्रवाह के निचले क्षेत्रों में जल के उपयोग का अधिकार रखने वाले देश के रूप में हमने विशेषज्ञ स्तर के साथ-साथ कूटनीतिक माध्यम से चीनी पक्ष के समक्ष उसके क्षेत्र में नदियों पर बड़ी परियोजनाओं के बारे में अपने विचार और चिंताएं लगातार व्यक्त की हैं।

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