Nepal Mountaineer Hari Budha Magar Story: कई लोगों के लिए दोनों पैर खो देना जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है, लेकिन नेपाल के हरी बुद्धा मगर ने इसे अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बना लिया। अफगानिस्तान में हुए एक बम विस्फोट में दोनों पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने दुनिया की सबसे कठिन पर्वत चोटियों को फतह कर इतिहास रच दिया।
आज हरी बुद्धा मगर दुनिया के पहले ऐसे डबल एम्प्यूटी (घुटनों के ऊपर से दोनों पैर गंवा चुके) पर्वतारोही हैं जिन्होंने सेवन समिट्स यानी सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की है।
नेपाल के एक साधारण परिवार में जन्मे हरी बुद्धा मगर बचपन से ही पहाड़ों के बीच पले-बढ़े। बाद में उन्होंने ब्रिटिश सेना की प्रतिष्ठित गोरखा रेजिमेंट में जगह बनाई। साल 2010 में अफगानिस्तान में तैनाती के दौरान उनका पैर सड़क किनारे लगाए गए IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) पर पड़ गया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि उनके दोनों पैर घुटनों के ऊपर से काटने पड़े। यह हादसा उनकी जिंदगी का सबसे कठिन दौर था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय नए सिरे से जीवन शुरू करने का फैसला किया।
हादसे के बाद शुरुआती दिनों में उनका लक्ष्य केवल इतना था कि वह खुद को जमीन से उठाकर व्हीलचेयर तक पहुंचा सकें। धीरे-धीरे उन्होंने शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाया। बचपन से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का सपना देखने वाले हरी ने कृत्रिम पैरों की मदद से पर्वतारोहण का प्रशिक्षण शुरू किया और असंभव दिखने वाले लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए।
मई 2023 में हरी बुद्धा मगर ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर इतिहास रच दिया। वह घुटनों के ऊपर से दोनों पैर गंवा चुके पहले व्यक्ति बने जिन्होंने एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने का कारनामा किया। इस उपलब्धि ने उन्हें दुनिया भर में प्रेरणा का प्रतीक बना दिया। एवरेस्ट के बाद हरी ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पर्वतारोहण अभियानों में शामिल सेवन समिट्स मिशन को पूरा करने का लक्ष्य तय किया।
जनवरी 2026 में अंटार्कटिका के माउंट विंसन पर सफल चढ़ाई के साथ उन्होंने सेवन समिट्स मिशन पूरा कर लिया और नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया।
हरी बुद्धा मगर के नाम अब पांच गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं। इनमें डबल एम्प्यूटी पर्वतारोही के रूप में एवरेस्ट, डेनाली और अन्य कठिन चोटियों पर चढ़ाई के रिकॉर्ड शामिल हैं। उनकी असाधारण उपलब्धियों को देखते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें प्रतिष्ठित ‘ICON’ सम्मान से भी सम्मानित किया है।
हरी का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि लोगों को प्रेरित करना है। उनके मुताबिक दिव्यांगता किसी व्यक्ति की क्षमता को परिभाषित नहीं करती। उन्होंने कहा कि लोगों ने कई बार उन्हें बताया कि वह यह नहीं कर सकते, लेकिन उन्होंने हर चुनौती को अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से पार किया।
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सेवन समिट्स मिशन पूरा करने के बाद भी हरी रुकना नहीं चाहते। उनका सपना अब उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने, समुद्र की गहराइयों की खोज करने और भविष्य में संभव हो तो अंतरिक्ष यात्रा करने का है। हरी बुद्धा मगर की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसका शरीर नहीं, बल्कि उसका आत्मविश्वास, साहस और कभी हार न मानने वाला जज्बा होता है।