Highlights
पाकिस्तान में 200 साल पुराने रामलीला मंदिर को किया गया सील।
मंदिर की जगह व्यावसायिक प्लाजा बनाने की कोशिश का विरोध।
हिंदू समुदाय और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जांच की मांग की।
डेरा इस्माइल खान में करीब 400 इमारतें सांस्कृतिक विरासत के रूप में चिह्नित।
धार्मिक संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जे की जांच कराने की मांग।
Hindu Temple Pakistan: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में करीब 200 साल पुराने रामलीला मंदिर को गिराकर वहां व्यावसायिक प्लाजा बनाने की कोशिश का मामला सामने आया है। हिंदू समुदाय के लोगों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद स्थानीय प्रशासन ने मंदिर को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) ने मंदिर को सील कर दिया।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, डेरा इस्माइल खान शहर के रहीम बाजार में स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर को गिराने का काम इसी सप्ताह शुरू करने की कोशिश की गई थी। इसकी जानकारी मिलने पर डेरा सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष और स्थानीय व्यापार संघ के पदाधिकारी सोहेल अहमद अजमी अन्य लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। वहां मौजूद एक व्यक्ति ने दावा किया कि उसे मंदिर गिराने का ठेका मिला है।
इसके बाद हिंदू समुदाय के सदस्यों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने बैठक कर प्रस्तावित निर्माण का विरोध किया। उन्होंने संपत्ति के मालिकाना हक और वहां व्यावसायिक निर्माण की वैधता की जांच कराने की मांग की। साथ ही पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में भी यह मामला उठाने की अपील की।
Pakistan के ईटीपीबी की सूची में शामिल है मंदिर
रामलीला मंदिर उन करीब 400 इमारतों में शामिल है, जिन्हें ईटीपीबी ने डेरा इस्माइल खान में सांस्कृतिक विरासत के रूप में चिह्नित किया है। यह सरकारी निकाय विभाजन के बाद भारत आए लोगों की छोड़ी गई संपत्तियों के साथ अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़ी संपत्तियों का प्रबंधन करता है।
ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट के अध्यक्ष हारून सरब डायल ने धार्मिक स्थलों को विशेष सुरक्षा देने की मांग की। उन्होंने 2013 से 2026 के बीच धार्मिक संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जे और उनकी बिक्री की व्यापक जांच कराने की भी अपील की।
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने अपनी हालिया रिपोर्ट में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट में जबरन विवाह, धर्मांतरण, ईशनिंदा कानूनों के कथित दुरुपयोग और रोजगार में भेदभाव जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।
फिलहाल रामलीला मंदिर प्रशासनिक कब्जे में है और उसे सील कर दिया गया है। स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता मंदिर की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने तथा संपत्ति के स्वामित्व और प्रस्तावित व्यावसायिक निर्माण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।