Matthew VanDyke Case: अमेरिकी नागरिक और सुरक्षा विशेषज्ञ मैथ्यू वैनडाइक की भारत में गिरफ्तारी और महज छह महीने के भीतर डिफॉल्ट बेल पर रिहाई ने बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। 13 मार्च 2026 को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किए गए वैनडाइक पर पूर्वोत्तर के रास्ते मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने और ड्रोन वारफेयर ट्रेनिंग से जुड़े होने के आरोप में एनआईए द्वारा शुरुआत में यूएपीए (UAPA) की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, 180 दिनों की निर्धारित समय-सीमा (8 सितंबर 2026) तक एनआईए द्वारा यूएपीए के तहत अंतिम चार्जशीट दाखिल न कर पाने के कारण विशेष एनआईए अदालत ने वैनडाइक और छह अन्य यूक्रेनी नागरिकों को वैधानिक जमानत (डिफॉल्ट बेल) दे दी। चार्जशीट में केवल इमीग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट के तहत मामले का उल्लेख था।
जमानत के बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मानवीय आधार पर वैनडाइक को 1 महीने के लिए अमेरिका लौटने की अनुमति दे दी। इस फैसले पर कांग्रेस और एआईएमआईएम (AIMIM) जैसे विपक्षी दलों ने तीखा हमला बोलते हुए केंद्र सरकार पर अमेरिकी दबाव (CIA प्रेशर) में झुकने का आरोप लगाया है। हालांकि, एनआईए का कहना है कि यूएपीए के तहत जांच अभी बंद नहीं हुई है और पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।