UP Assembly Election BJP Strategy: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में जीत की हैट्रिक बनाने की चाह रखने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक साथ दो मोर्चों को धार देकर मतदाताओं को रिझाएगी। जहां पार्टी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भगवा संत वाली इमेज को आगे रखते हुए अपने दशकों पुराने हिन्दुत्व के एजेंडे को धार देगी वहीं जातीय खांचे में बुरी तरह बंटे बिहार विधानसभा चुनावों में जीत की इबारत लिखने वाले महामंत्री विनोद तावड़े को प्रभार देकर उसी जादू को उत्तर प्रदेश में चलाने का काम सौंपा गया।
उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनने के तुरंत बाद विनोद तावड़े ने अपने पहले दौरे में ही विपक्षी समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) रणनीति पर हमला बोलने के साथ उसकी काट निकालने पर काम करना शुरू कर दिया है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते 15 दिनों में धर्मनगरी काशी-मथुरा-अयोध्या के ताबड़तोड़ दौरों के साथ हिन्दुत्व का तड़का लगा विकास की थाली परोसने का काम किया है।
प्रभारी बनने के बाद राजधानी लखनऊ पहुंचे विनोद तावड़े ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विस्तारपूर्वक मुलाकात कर इस दोहरी रणनीति पर ही आगे बढ़ने की सहमति बनाई है। रणनीति के तहत जहां संगठन जातीय समीकरणों को साधने का काम करेगा वहीं योगी विकास संग हिन्दुत्व की आजमाई नीति को जोर-शोर से प्रचारित करेंगे।
पहले बिहार और फिर बंगाल चुनाव में ममता का किला धवस्त करने के बाद उत्साह से लबरेज भाजपा ने अब अपनी पूरी ताकत यूपी में झोंकने का फैसला किया है। लगातार दो विधानसभा चुनाव जीत के बाद तीसरी जीत के लिए आतुर भाजपा ने इस चुनाव में कई रणनीतियों पर एक साथ काम करने की ठानी है। जहां पार्टी अपने कोर एजेंडा हिन्दुत्व को मुख्यमंत्री योगी की भगवा संत वाली छवि के साथ धार दे रही है वहीं प्रभारी विनोद तावड़े के नेतृत्म में पूरा संगठन सपा के पीडीए की काट निकालने में जुट गया है।
रणनीति को अंजाम देने के लिए भाजपा अपने सहयोगी दलों ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी व निषाद पार्टी का भी भरपूर प्रयोग कर रही है। अति पिछड़े राजभर समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे ओमप्रकाश राजभर जहां सपा प्रमुख पर एक ही पिछड़ी जाति यादव व मुसलमानों के लिए काम करने का रोज आरोप जड़ रहे हैं वहीं निषाद पार्टी भी इसी तरह के आरोप लगा रही है।
विनोद तावड़े ने भी यूपी में सक्रिय होते ही सबसे ज्यादा हमले सपा के पीडीए वाले नारे पर करना शुरू किया है। माना जा रहा है कि पीडीए की काट के लिए भाजपा की ओर से इस बार उसके गठबंधन में शामिल जातीय अस्मिता वाले दलों निषाद पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल व राष्ट्रीय लोक दल को भी अधिक सीटें दी जाएंगी ताकि सपा के मुकाबले में गैर यादव पिछड़ी जातियों की गोलबंदी हो सके।
इसके अलावा योगी आदित्यनाथ को हिन्दुत्व की पिच पर खुल कर बैटिंग की पूरी छूट दी गयी है। पार्टी ने उन्हें हिन्दू एकता के नाम पर ध्रुवीकरण के अभियान को पैना करने के काम में लगा दिया गया है।